परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

तीर्थंकर महावीर कुमारग्राम के बाहर ध्यानस्थ थे। वही एक ग्वाला आया। महावीर के निकट पहुंचकर उसने अपनी गायों को गिना तो दो गायें कम थी। उसने ध्यानस्थ महावीर से कहा , ‘ साधो ! मेरी दो गायें पीछे छूट गई है। मैं उन्हें लेने जाता हूं। जरा इन गायों का ध्यान रखना।’ महावीर से बिना… अधिक पढ़ें परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

अमृत नहीं बांट सकते तो विष फैलाने का अधिकार तुम्हें किसने दिया ? Amrit Nahin bant sakte to Vish failane Ka adhikar tumhen kisne Diya ?

अह्रतृ महावीर उत्तर वाचाल की ओर जा रहे थे। मार्ग में दो पगडण्डियां आयीं। ग्रामीणों ने बताया , ‘ यह वह पगडंडी है जो सीधी उत्तर वाचाल पहुंचती है और दूसरी घूमकर । लेकिन आप दूसरी पगडंडी पर जाएं , क्योंकि छोटी पगडंडी के मार्ग में महाविषधर सर्प रहता है । जहां उस नागराज का… अधिक पढ़ें अमृत नहीं बांट सकते तो विष फैलाने का अधिकार तुम्हें किसने दिया ? Amrit Nahin bant sakte to Vish failane Ka adhikar tumhen kisne Diya ?

लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

अभिनिष्क्रमण से पूर्व जब तीर्थंकर महावीर वर्षी दान दे रहे थे , तब सोमभट्ट ब्राह्मण जीविकोपार्जन के लिए विदेश गया हुआ था , पर भाग्य का मारा वह खाली हाथ लौटा। पत्नी ने कहा , ‘ अब क्या आए हो ! जब यहां धन लूटा रहे थे महावीर , तब तुम बाहर थे और जब… अधिक पढ़ें लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

ऋषभ के साथ आमोद – प्रमोद करने के लिए देव- देवेंद्र- विद्याधर आया करते थे। आज ऋषभ का जन्म – दिवस था। स्वयं देवेंद्र देवलोक की नृत्यांगना नीलांजना के साथ ऋषभ को बधाई देने पहुंचे थे। ऋषभ और देवेंद्र अपने मित्रों और सहचरों के साथ नीलांजना का भावविभोर नृत्य देख रहे थे। देवेंद्र ने देखा… अधिक पढ़ें कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

सत्य ही शाश्वत है बाकी सब झूठ है Satya hi shashwat hai Baki sab jhoot hai

यूनान के सम्राट को अपने धन-वैभव का बहुत घमंड था। उसे अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता था। एक बार सम्राट ने यूनान के विद्वान ‘सोलन’ को अपने राजमहल में बुलाया। सम्राट को उम्मीद थी कि सोलन सम्राट के वैभव को देख कर प्रशंसा में कुछ कहेगा, किंतु सोलन था सुकरात जैसा विद्वान विचारक। सम्राट ने… अधिक पढ़ें सत्य ही शाश्वत है बाकी सब झूठ है Satya hi shashwat hai Baki sab jhoot hai

स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.

महाराज शीलभद्र वन – उपवनों में होते हुए तीर्थयात्रा के लिए जा रहे थे। रात्रि को उन्होंने एक आश्रम के निकट अपना पड़ाव डाला। आश्रम में आचार्य दम्पत्ति अपने कुछ शिष्यों के साथ निवास करते थे। शिष्यों का शिक्षण , ईश्वर आराधना , जीवन निर्वाह के लिए शरीर श्रम , इन्हीं में आश्रमवासियों का दिनभर… अधिक पढ़ें स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.

लोभ से विनाश ही होता है lobh se vinash hi hota hai

 बहुत समय पहले की बात है , किसी गांव में एक किसान रहता था , गांव में ही खेती का काम करके अपना और अपने परिवार का पेट पलता था। किसान अपने खेतों में बहुत मेहनत से काम करता था , परन्तु इसमें उसे कभी लाभ नहीं होता था। एक दिन दोपहर में धूप से… अधिक पढ़ें लोभ से विनाश ही होता है lobh se vinash hi hota hai

कामना और लालच का बंधन kamna aur lalach Ka Bandhan

 बहुत समय पहले की बात है। किसी शहर में एक ब्यापारी रहता था। उस ब्यापारी ने कहीं से सुन लिया कि राजा परीक्षित को भगवद्कथा सुनने से ही ज्ञान प्राप्त हो गया था। ब्यापारी ने सोचा कि सिर्फ कथा सुन ने से ही मनुष्य ज्ञानवान हो जाता है तो में भी कथा सुनूंगा और ज्ञानवान… अधिक पढ़ें कामना और लालच का बंधन kamna aur lalach Ka Bandhan

क्रोध से फूल भी जलते हैं krodh se phool bhi jalte Hain

क्रोध से फूल भी जलते हैं बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ में निर्णायक थी मंडन मिश्र की धर्मपत्नी देवी भारती। हार – जीत का निर्णय होना बाकी था , इसी बीच देवी भारती को किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय… अधिक पढ़ें क्रोध से फूल भी जलते हैं krodh se phool bhi jalte Hain

महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

महाभारत युद्ध समाप्ति की ओर था , युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया। अपनी आखरी सांसे ले रहा दुर्योधन अश्वत्थामा से बोला की तुम यह कार्य निति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक पर मुझे पांचो पांडवो का कटा हुआ शीश देखना है। दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने… अधिक पढ़ें महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap