हर धर्म का सार मानवता के गुणों को विकसित करने में है Har dharm ka saar manavta ke gunon ko viksit karne mein hi hai

यह उन दिनों की बात है , जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका में थे। वहां कई महत्वपूर्ण जगहों पर उन्होंने व्याख्यान दिए। उनके व्याख्यानों का वहां जबर्दस्त असर हुआ। लोग स्वामी जी को सुनने और उनसे धर्म के विषय में अधिक अधिक से जानने को उत्सुक हो उठे।             उनके धर्म संबंधी विचारों से प्रभावित होकर एक… अधिक पढ़ें हर धर्म का सार मानवता के गुणों को विकसित करने में है Har dharm ka saar manavta ke gunon ko viksit karne mein hi hai

बाहर की दुनिया में कपड़े चलते हैं bahar ki duniya mein kapde chalte Hain

कवि गालिब को एक दफा बहादुरशाह ने भोजन का निमंत्रण दिया था। गालिब था गरीब आदमी। और अब तक ऐसी दुनिया नहीं बन सकी कि कवि के पास भी खाने-पीने को पैसा हो सके। अच्छे आदमी को रोजी जुटानी अभी भी बहुत मुश्किल है। गालिब तो गरीब आदमी थे। कविताएं लिखी थीं , ऊँची कविताएं… अधिक पढ़ें बाहर की दुनिया में कपड़े चलते हैं bahar ki duniya mein kapde chalte Hain

राजा की तीन सीखें Raja ki teen sikhen

बहुत समय पहले की बात है , सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था। राजा के तीन पुत्र थे , एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें। इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को… अधिक पढ़ें राजा की तीन सीखें Raja ki teen sikhen

मृत्यु का दर्शन mrutyu ka darshan

एक प्राचीन रूसी कथा है। एक बड़े टोकरे में बहुत से मुर्गे आपस में लड़ रहे थे। नीचे वाला खुली हवा में सांस लेने के लिए अपने ऊपर वाले को गिराकर ऊपर आने के लिए फड़फड़ाता है। सब भूख – प्यास से व्याकुल हैं। इतने में कसाई छुरी लेकर आ जाता है , एक –… अधिक पढ़ें मृत्यु का दर्शन mrutyu ka darshan

अपने कर्म को शुद्ध कैसे करे Apne karma ko shuddh Karen

हमें अपना पुण्य छुपा कर रखना चाहिए तथा यदि हमारा पाप प्रगट हो जाय तो चिन्ता नहीं करनी चाहिए। यदि पाप प्रगट हो तो उसका विनाश हो जाता है। परन्तु सभी लोग अपने पापों को तो छिपा कर रखते है तथा पुण्य को प्रगट कर देते है। जिससे पुण्य धीरे-धीरे क्षीण होता जाता है। तथा… अधिक पढ़ें अपने कर्म को शुद्ध कैसे करे Apne karma ko shuddh Karen

संत ज्ञानेश्वर ने किया चांगदेव के अहंकार का नाश Sant gyaneshwar ne Kiya changdev ke ahankar ka naash

चांगदेव नाम के एक हठयोगी थे इन्होंने योग सिद्धि से अनेको सिद्धियाँ प्राप्त कर रखी थी तथा मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कर ली थी उनकी उम्र 1400 वर्ष हो गई थी। चांगदेव को यश-प्रतिष्ठा का बहुत मोह था। वह अपने आप को सबसे महान मानते थे। इन्होंने जब संत ज्ञानेश्वर की प्रशंसा सुनी तो… अधिक पढ़ें संत ज्ञानेश्वर ने किया चांगदेव के अहंकार का नाश Sant gyaneshwar ne Kiya changdev ke ahankar ka naash

केवल अपना कर्म करों दुसरो से आशा मत रखो keval apna karam karo dusron se Asha mat rakho

आज हम जब भी किसी के लिए कुछ भी करते है तो हम दुसरे से भी यही अपेक्षा रखते है कि वो भी हमारे लिए वहीं करे …पर आप बताएं क्या यह सही है ..आपके संस्कार ,आपकी विशेषताएं ,आपका अनुभव‌ ,आपका नज़रियां दुनिया से अलग है आप जैसा करे वैसा दुसरे भी करे ये संभव… अधिक पढ़ें केवल अपना कर्म करों दुसरो से आशा मत रखो keval apna karam karo dusron se Asha mat rakho

प्रेम भरा व्यवहार हमें लोगों से जोड़ता है। Prem bhara vyavahar hamen logon se jodta hai

प्रेम के बिना मानव जीवन का कोई अर्थ नहीं होता। प्रेम और भक्ति में जब समर्पण की भावना जुड़ जाती है तब एक शक्ति का निर्माण होता है। जीवन के लिए संजीवनी है प्रेम। क्योंकि प्रेम परमात्मा की एक अनुपम देन है। मनुष्य को परमात्मा ने अनेक प्रकार की विशिष्टताओं से युक्त बनाया है। उसमें… अधिक पढ़ें प्रेम भरा व्यवहार हमें लोगों से जोड़ता है। Prem bhara vyavahar hamen logon se jodta hai

पड़े निन्यानवे के चक्कर में pade Ninyanve ke chakkar mein

सेठ करोड़ी मल पैसे से तो करोड़पति था मगर खर्च करने के मामले में महाकंजूस। उसका ये हाल था कि चमड़ी जाये पर दमड़ी न जाए। उस की इस आदत से उसके बीवी बच्चे बहुत परेशान थे। सब कुछ होते हुए भी करोड़ी मल खाने पीने तक में कंजूसी करता था। उसका बस चले तो… अधिक पढ़ें पड़े निन्यानवे के चक्कर में pade Ninyanve ke chakkar mein

शरीर के साथ ये संतुलन जीवन को सुखी बनाता है… sharir ke sath yah santulan jivan ko sukhi banata hai…

मनुष्य शरीर और आत्मा दोनों से बना है , लेकिन इस सिद्धांत को व्यावहारिक रूप से समझना होगा। जीवन में जो भी क्रिया करें , दोनों को समझकर करें। केवल शरीर पर टिककर करेंगे तो जीवन भौतिकता में ही डूब जाएगा और केवल आत्मा से जोड़कर करेंगे तो अजीब-सी उदासी जीवन में होगी। न बाहर… अधिक पढ़ें शरीर के साथ ये संतुलन जीवन को सुखी बनाता है… sharir ke sath yah santulan jivan ko sukhi banata hai…