अवसर को पहचानो avsar ko pehchano

कई लोगों के पास यह बहाना होता है कि हमें तो जिंदगी में कोई अच्छा अवसर ही नहीं मिला, इसीलिए हमें छोटा-मोटा कार्य करके जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। यह सिर्फ मन की कमजोरी को छुपाने का एक बहाना मात्र है।

हर मनुष्य के जीवन में अनेक बेहतरीन अवसर आते हैं, लेकिन वह आलस्य, असफलता का भय, आत्मविश्वास की कमी या निर्णय क्षमता के अभाव के कारण उन्हें ठुकरा देता है। कोई भी इंसान याद करें, तो उसको याद आ जाएगा कि उसके जीवन में कितने अवसर आए थे। उसके सामने ही कुछ लोगों ने उस अवसर को स्वीकार किया और उससे बहुत आगे निकल गए। यहां तक कि इंसान जो कार्य कर रहा है, उसे भी एक बड़े अवसर के रूप में करे, तो हर कार्य में भी एक बड़ा अवसर छुपा है। बहादुर तो वे होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में एक अच्छे अवसर का निर्माण कर लेते हैं। पर यह सब कर वे ही पाते हैं, जो बचाव का रास्ता नहीं अपनाते हैं, बल्कि कार्य को उत्साह पूर्वक करते हैं। मेहनत करने से मुंह नहीं मोड़ते हैं।

संघर्षशील इंसान तो हर जगह अवसर बना लेते हैं, लेकिन बचाव प्रवृत्ति वाले इंसान अच्छे से अच्छे अवसर को भी ठुकरा देते हैं।

जिंदगी में अवसरों की कमी नहीं होती। हां, अवसर को पहचानने का तरीका आना चाहिए और अवसर का उपयोग करने का पक्का इरादा होना चाहिए। स्वयं का एक उचित विश्लेषण होना चाहिए। केवल मन में डर लिए बैठे रहना और हर अवसर को ठुकराते जाने से तो जीवन में कुछ हासिल नहीं होने वाला। लोग इतने अधिक संकुचित हो जाते हैं कि हर अवसर में कुछ न कुछ कमियां निकालते रहते हैं और जिंदगी को बिना कुछ किए ही गुजार देते हैं। इससे तो अच्छा होता किसी अवसर का चुनाव करते और वह गलत भी साबित होता तब भी सीखने का एक अच्छा अवसर तो मिलता।

इंसान यदि मेहनत करने के लिए तैयार हो, तो अवसर को पहचानने का कार्य इतना मुश्किल नहीं है। मुश्किल तब है, जब कम काम करके ज्यादा हासिल करने की इच्छा हो।

निश्चित रूप से इंसान को उतना ही जोखिम लेना चाहिए, जितना उसकी क्षमता हो, लेकिन यह भी तय है कि जोखिम उठाए बिना तो बड़ा अवसर मिल ही नहीं सकता। सामान्य रूप से तो सामान्य कार्य करने को मिल सकता है।

अवसर नहीं है ऐसा कहना सिर्फ काम से बचने का बहाना है। अवसर तो इंसान ही बनाता है। इंसान का जन्म ही अवसर बनाने के लिए हुआ है। इंसान को यह कहने का अधिकार ही नहीं है कि अवसर नहीं है। एक जिम्मेदार इंसान अनेक लोगों के लिए अवसर बना देता है, जबकि एक गैर जिम्मेदार इंसान अपनी जिंदगी के लिए भी अवसर नहीं खोज पाता।

आपके समक्ष एक उदाहरण रखना चाहता हूं कृपया आप ध्यान से पढ़िएगा।

दो दोस्त थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों ही काम की तलाश कर रहे थे। दोनों के पास अच्छी नौकरी का अवसर था, जिसमें तनख्वाह निश्चित थी, पर साथ में एक मार्केटिंग का अवसर भी था, जिसमें किसी प्रोडक्ट की मार्केटिंग करनी थी और जितना कार्य ज्यादा करो उतनी ही आमदनी ज्यादा हो सकती थी। उन्होंने इस प्रोडक्ट को समझा। उन्हें प्रोडक्ट बहुत अच्छा लगा, काफी काम किया जा सकता था। नौकरी के बदले उसमें काफी ज्यादा आमदनी प्राप्त की जा सकती थी। फिर भी उनमें से एक को थोड़ा जोखिम लग रहा था। बोला, पता नहीं, नहीं कर पाए, तो नौकरी से भी जाएंगे। लेकिन दूसरा बोला, नौकरी तो फिर भी मिल जाएगी, एक बार यह कार्य जरूर करके देखना चाहिए। मुझे इसमें बड़ा भविष्य नजर आता है।

दोनों के विचार अलग-अलग थे। एक ने नौकरी का चुनाव किया और दूसरे ने व्यक्तिगत तौर पर मार्केटिंग करने का। नौकरी वाला तो नौकरी करता रहा और उसे निश्चित आमदनी मिलती रही, लेकिन मार्केटिंग वाले को शुरुआत में उतनी सफलता नहीं मिल पाई। जैसा उसने सोचा था उसका एक चौथाई परिणाम भी वह नहीं ला सका। काफी प्रयास किया, तो थोड़ा सुधार हुआ, पर वह बात नहीं हो पा रही थी। जिस उम्मीद से उसने यह कार्य चुना था, उसके अनुसार कुछ भी नहीं हो पा रहा था।

उसके दोस्त ने फिर उससे कहा कि अब भी मान जाओ और नौकरी कर लो। मुझे देखो ज्यादा अमीर तो नहीं बन सकता हूं और गुजारा तो हो ही रहा है।

उसे अपने दोस्त की बात अभी भी समझ में नहीं आ रही थी। वह बड़ा सपना देख चुका था। अब वह पुनः पीछे नहीं लौटना चाहता था। उसने फिर से अपने काम का विश्लेषण किया। प्रोडक्ट का विश्लेषण किया और पाया कि प्रोडक्ट हर दृष्टि से अच्छा है। उसने इस लाइन में काम कर रहे अन्य लोगों के बारे में पता लगाया, तो पता चला कि काफी सारे लोग बहुत अच्छी तरह सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। तब उसने सोचा, जरूर मेरे काम करने के तरीके में कहीं कमी है। उसमें सीखने की चाहत पैदा हो गई और उसने सीखना शुरू कर दिया। कुछ किताबों से सीखा, कुछ इस दिशा में सफलतापूर्वक काम करने वाले लोगों से सीखा, कुछ खुद के अनुभव से सीखा। अब उसने निश्चय कर लिया कि हर दिन अपने कार्य मैं बेहतरी आऊंगा। इस सीखने की इच्छा ने उसे मार्केटिंग का सफल व्यक्ति बना दिया। उसका विश्वास बढ़ता गया और वह अपने हर सपने को पूरा कर सका।

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