संघर्ष के बिना सफलता असंभव है। Sangharsh ke Bina safalta asambhav hai.

किसी भी कार्य में यदि सफल होना चाहते हो तो उसे खुल कर जितने की भावना से करना होगा ।यदि बचने की भावना से कार्य करोगे तो असफलता निश्चित है।यदि हर निर्णय से, हर चुनौती से बचने का रास्ता खोजोगे, तो सफलता हासिल हो ही नहीं सकती। हर काम को शुरू करने से पहले यह सोच लिया कि यदि इसे मैं ठीक से न कर पाया, तो क्या होगा और इस डर से कोई भी कार्य शुरू ही नहीं किया तो फिर सफलता मिलने का तो सवाल ही कहां पैदा होता है। यदि कोई कार्य शुरू भी किया और एक – दो प्रयास में ही हार मान ली कि मुझसे तो यह नहीं हो पाएगा, तो भी सफलता नहीं मिल सकती। किसी भी कार्य के लिए लगातार प्रयास करोगे, तभी तो सफलता हासिल होगी। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि पानी में से घी निकालने का प्रयास करो। आवश्य कार्य का चुनाव समझदारी पूर्वक होना चाहिए। दूरदृष्टि होनी चाहिए। लेकिन सही कार्य चुनने के पश्चात उस में लगातार प्रयासरत रहने पर ही सफलता मिलती है।

आप आश्चर्य करोगे की संघर्ष की परिणीति दु:खद नहीं है, बड़ी सुखद है। दु:खद तो बचाव की परिणीति है। संघर्ष के बाद जो जीत मिलती है, उसमें बड़ा आनंद है। वैसे भी जो संघर्ष को स्वीकार कर लेता है, उसके लिए वह संघर्ष, संघर्ष नहीं रह जाता है। वह तो उसके लिए खेल बन जाता है। वह तो उसे बड़े मजे़ से खेलता है। जो व्यक्ति संघर्ष को स्वीकार नहीं करता, उसे ही संघर्ष भारी लगता है। वही उससे बचने का प्रयास करता है। वह हमेशा शिकायतों से भरा रहता है और सफलता उससे भी लोग दूर होती जाती है।

इस दुनिया के सफल लोगों की कहानी पढ़ोगे, तो पता चलेगा कि उन्होंने ऐसे कार्य का चुनाव किया, जिससे लोग प्रायः बचने का प्रयास करते हैं, जिसमें लोगों को सुरक्षित नहीं लगता है। उसके पश्चात वे बार-बार उस में असफल होने के बाद भी उस में और अधिक प्रयास बढ़ाते जाते हैं। जिसे दुनिया वाले मान लेते हैं कि यह कार्य होना संभव नहीं है, लेकिन वह कहते हैं कि यह संभव है और वह उसे करके दिखा देते हैं। ऐसी स्थिति में ही कहानी बनती है।

उनके रवैये में आम आदमी से कुछ बातें अलग होती हैं। उनके मन में हारने का डर नहीं होता है। वह उस कार्य को खेल भावना से करते हैं। वे ऐसा मानते ही की हार भी गए, तो कोई बात नहीं लेकिन प्रयास करना नहीं छोडूंगा और इसी से उनकी जीत हो जाती है।

वह कार्य वे अपनी सुरक्षा के लिए नहीं करते, बल्कि वह उनका जुनून होता है। उसे वे अपने जीवन का मक़सद बना लेते हैं

उनमें सीखने की एक अलग प्रवृत्ति होती है। वे बाहरी दुनिया की बजाय खुद के अनुभव व खुद की गलतियों से ज्यादा सीखते हैं। वे कुछ ना कुछ नई खोज करते रहते हैं। वे आत्मनिर्भर होते हैं। हर जिम्मेदारी लेने में उन्हें कोई संकोच नहीं होता। वे ज्यादा शिकायतों में विश्वास नहीं करते हैं। उनका नज़रिया बहुत ही ज़्यादा सकारात्मक होता है।

उनमें जितना जोश होता है, उतना ही होश भी होता है। अपने कार्य की योजना वे स्वयं बनाते हैं और उसका विश्लेषण हर दृष्टिकोण से स्वंय करते हैं।

दूसरों के नकारात्मक विचारों से प्रभावित नहीं होते। उन्हें अपने निर्णय पर पूरा भरोसा होता है।

मनुष्य के भीतर असीमित क्षमताएं हैं। वह जिस माहौल में जीता है, उसी के अनुसार क्षमताओं का विकास होता है, इसीलिए कमजोरी या डर के माहौल में जीना स्वंय बहुत बड़ा दमन है। असुरक्षा का भय मन में से निकाल कर अधिकतम क्षमताओं को खुलकर बाहर आने का मौक़ा देना व्यक्ति का अपने आप के प्रति सबसे बड़ा फर्ज है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s