हम जीवन भर सिर्फ शरीर सुख पाने के लिए कर्म करते हैं ham jivan Bhar sirf sharir sukh pane ke liye karam karte Hain

देह के रागी तथा घुमने के शौकीन गर्मियों में माउंट आबू नैनीताल शिमला आदि स्थानों पर जाकर महीना भी लगा आए तो भी कम लगता है। परंतु भगवान की प्रतिष्ठा, अठाई महोत्सव जैसे धार्मिक प्रसंगों में और आठ दिनों के लिए भी जाना हो तो सोचना पड़ता है। शरीर को मजबूत बनाने के लिए सर्दियों की कड़कड़ाती ठंड में भी प्रातः काल खुले शरीर से व्यायाम कसरत करने के लिए तैयार हो जाते हैं। परंतु प्रात:काल मंदिर में जाकर प्रभु की प्रक्षाल कराने पूजा करने में बहुत ठंड लगती है। अतः सर्दियों में पूजा भी छोड़ देते हैं। मित्रों से बातचीत करने के लिए घंटों खड़े रहेंगे, टिकिट न मिले तो घंटों खड़े रहेंगे तो पैर कमर कुछ नहीं दिखेगा परंतु प्रतिक्रमण करने के लिए उठ – बैठ करनी पड़े तो खड़े-खड़े का काउसग्ग करना पड़े तो कमर पैर धुटने सब दुखने लग जाते हैं।
स्नान करने के लिए बाथरूम में जाएं तो आधा घंटा तक बाहर नहीं निकलते परंतु पूजा करने के लिए परमात्मा के मंदिर में जाएं तो दस मिनट से ज्यादा नहीं लगाते। पेट भरने के लिए थाली के पास बैठते हैं तो दस आइटम होने पर भी यदि एकाध चटनी जैसी आइटम रह जाए तो खाने का स्वाद उड़ जाता है।
शास्त्रों में कहा है कि भगवान की पूजा अष्ट प्रकारी करनी चाहिए परंतु उसके बदले यदि अंगूठे पर ही तिलक करके आ जाएं तो मन में संतोष हो जाता है कि मैंने पूजा कर ली। प्रवचन सुनने जाएं तो पांच मिनट प्रवचन लंबा हो जाए तो घड़ी देखते रहते हैं। यह सभी देहलक्ष्मी के वास्तविक चित्र है। शास्त्रों में कहा है कि, “देह दुक्ख महाफलम है” परंतु हम तो देह को सुखी बना आत्मा को चौरासी के चक्कर में डाल देते हैं।
एक जेब काटने वाला व्यक्ति दुकान के बाहर बैठकर “नई फैशन का कपड़ा” नामक पुस्तक पढ़ रहा था। अचानक उसके मित्र ने आकर उसके हाथ वाली पुस्तक देखकर आश्चर्य से पूछा – दोस्त ! क्या पाकेट मारी का काम छोड़ दिया है और दर्जी का काम चालू कर दिया है ? मित्र बोला,” ना रे ना !” तो यह पुस्तक लेकर क्यों बैठे हो ? मित्र ने कहा – यह इसलिए कि अभी जो नए फैशन के कपड़े तैयार हो रहे हैं उनमें जेब का पता नहीं लगता इसीलिए यह पुस्तक पढ़ रहा हूं कि पता लग जाए कि नए फैशन वाले कपड़ों में जेब कहां पर लगती है। पहले जानकारी से जेब काटने में मुश्किल नहीं पड़ती। कैसी देह के साथ आसक्ति ?

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s