किताबी पढ़ाई से अधिक अनुभव ज्ञान जरूरी है Kitabi padhaai se adhik anubhav Gyan jaruri hai

किसी शहर में महाकाय फैक्ट्री थी।
उसमें लगभग सात सौ लोग काम करते थे। एक बार छोटी सी बात का बतंगड़ हो गया। फैक्ट्री में रबड़ का एक टेढ़ा मेढ़ा पाइप था। उसमें रबड़ का एक पतला सा वायर डालकर दूसरे छोर से बाहर निकालना था। काफी मेहनत की गई पर टेढ़े मेढ़े पाइप से वायर आगे बढ़ने का नाम ही ना ले रहा था। वह अंदर मुड़ जाता था।
अनेक बड़े इंजीनियर आए पर सारे विफल हुए। इतनी सी बात को लेकर शर्मिंदगी  अनुभव करने लगे।
बहत्तर घंटे निकल गए।
ऐसे में एक गंवार आदमी वहां गया।
देखने में भिखमंगे जैसा और अंगूठा टेक । अनेक लोगों की भीड़ के बीच जा खड़ा हो गया। परेशानी की जड़ उसकी समझ में आ गई।
उसने कहा, “अभी तत्काल में वायर को बाहर निकाल देता हूं पर एक एक सौ रूपए चार्ज लगेगा।”
मालिक ने स्वीकृति दे दी।
वह एक बहुत छोटी सी चूहिया पकड़ लाया।  उसकी पूछ से वायर बांधा और चूहिया को रबड़ के पाइप में ढकेल दिया।
वह घबराकर आगे ही आगे दौड़कर दूसरे  छोर से बाहर निकल गई। उसी के साथ वायर भी बाहर आ गया।
ऐसा अद्भुत अनुभवज्ञान।