कर्म का महत्त्व ही जीवन का सार है। Karam ka mahatva hi jivan ka sar hai.

एक बेरोजगार आदमी की पत्नी ने उसे घर से निकालते हुए कहा आज कुछ न कुछ कमाकर ही लौटना नहीं तो घर में नहीं घुसने दूंगी।

आदमी दिन भर इधर – उधर भटकता रहा , लेकिन उसे कुछ काम नहीं मिला। निराश मन से वह जा रहा था कि उसकी नजर एक मरे हुए सांप पर पड़ी। उसने एक लाठी पर सांप को लटकाया और घर की ओर जाते हुए सोचने लगा , इसे देखकर पत्नी डर जायेगी और आगे से काम पर जाने के लिए नहीं कहेगी।

घर जाकर उसने सांप को पत्नी को दिखाते हुए कहा , ‘ यह कमाकर लाया हूं। ‘ पत्नी ने लाठी को पकड़ा और सांप को घर की छत पर फेंक दिया। वह सोचने लगी कि मेरे पति की पहली कमाई जो कि एक मरे हुए सांप के रूप में मिली , ईश्वर जरूर इसका फल हमें देंगे क्योंकि मैंने सुना है कि कर्म का महत्त्व होता है।

वह कभी व्यर्थ नहीं जाता। तभी एक बाज उधर से उड़ते हुए निकला जिसने अपनी चोंच में एक कीमती हार दबा रखा था। बाज की नजर छत पर पड़े हुए सांप पर पड़ी। उसने हार को वहीं छोड़ा और सांप को लेकर उड़ गया।

पत्नी ने हार को पति को दिखाते हुए सारी बात बताई। पति अब कर्म के महत्व को समझ चुका था। उसने हार को बेचकर अपना व्यवसाय शुरू किया। कल का गरीब इंसान आज का सफल व्यवसायी बन गया था।

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