निंदा करने से दूसरों के साथ अपना भी नुकसान होता है ninda karne se dusron ke sath apna Bhi nuksan hota hai

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की।

राजा ने अपने मंत्री से , जो कई भाषाओं का जानकार था , पूछा – यह क्या कह रहा है ?

मंत्री ने विदेशी की गालियां सुन ली थीं , किंतु उसने कहा – महाराज ! यह आपको दुआएं देते हुए कह रहा है – आप हजार साल तक जिएं।

राजा यह सुनकर बहुत खुश हुआ , लेकिन एक अन्य मंत्री ने जो पहले मंत्री से ईष्या रखता था , आपत्ति उठाई – महाराज ! यह आपको दुआ नहीं गालियां दे रहा है।

वह दूसरा मंत्री भी बहुभाषी था। उसने पहले मंत्री की निंदा करते हुए कहा – ये मंत्री जिन्हें आप अपना विश्वासपात्र समझते हैं , असत्य बोल रहे हैं।

राजा ने पहले मंत्री से बात कर सत्यता जाननी चाही , तो वह बोला – हां महाराज ! यह सत्य है कि इस अपराधी ने आपको गालियां दीं और मैंने आपसे असत्य कहा ।

पहले मंत्री की बात सुनकर राजा ने कहा – तुमने इसे बचाने की भावना से अपने राजा से झूठ बोला।

मानव धर्म को सर्वोपरि मानकर तुमने राजधर्म को पीछे रखा। मैं तुमसे बेहद खुश हुआ।

फिर राजा ने विदेशी और दूसरे मंत्री की ओर देखकर कहा – मैं तुम्हें मुक्त करता हूं। निर्दोष होने के कारण ही तुम्हें इतना क्रोध आया कि तुमने राजा को गाली दी और मंत्री महोदय तुमने सच इसलिए कहा – क्योंकि तुम पहले मंत्री से ईष्या रखते हो। ऐसे लोग मेरे राज्य में रहने योग्य नहीं। तुम इस राज्य से चले जाओ।

वस्तुत: दूसरों की निंदा करने की प्रवृत्ति से अन्य की हानि होने के साथ-साथ स्वयं को भी नुकसान ही होता है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s