क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

हिन्दू धर्म में पूरणो और वेदो  के अनुसार ॐ नमः शिवाय का मन्त्र खुद में इतना सर्वशक्तिमान , सर्वशक्तिशाली तथा सम्पूर्ण ऊर्जा का श्रोत है की मात्र इसके उच्चारण से ही समस्त दु:खो , कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है।

ॐ अक्षर के बिना किसी घर की पूजा पूर्ण नही मानी जाती , आपने अक्सर धर्मिक जगह में हो रही कथाओ , पाठों व आरतियों  में ॐ का उच्चारण अवश्य ही सुना होगा । कहते है बिना ओम के सृष्टि की कल्पना भी नही करी जा सकती व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड से सदा ओम की ध्वनि  निकलती है।

ओम तीन अक्षरो अ , उ तथा म से मिलकर बना है जिनमे “अ “ का अर्थ होता है उत्तपन होना , “उ “का अर्थ है उठना यानि विकास होना तथा “म ” का अर्थ है मौन धारण करना यानी ब्रह्मलीन हो जाना।


ओम अक्षर से कई दिव्य शक्तिया व बहुत गहरे अर्थ जुड़े हुए है जिसे अलग – अलग पुराणों व शास्त्रो में विस्तृत ढंग से बताया गया है। शिव पुराण में ओम को प्रणव नाम से पुकारा गया है  जिसमे “प्र ” से अभिप्राय प्रपंच , न यानी नही , “वः ” यानी तुम लोगो के लिए। इस तरह प्रणव शब्द का सार है , इस संसारिक जीवन के प्रपंच यानी कलेस , दुःख आदि से मुक्ति पाकर जीवन का वास्तविक एकमात्र लक्ष्य मोक्ष को पा जाना। दूसरे अर्थो में प्रणव के , “प्र ” यानी संसार रूपी सागर को “नव ” यानी नाव द्वारा पार करवाने वाला तरीका बताया गया है।

इसी तरह ऋषि-मुनियो के अनुसार प्र को प्रकर्षेण ,’न – नयेत् और व: युष्मान् मोक्षम् इति वा प्रणव: कहा गया है।  जिसका सरल शब्दों में मतलब है हर भक्त जो इस मन्त्र का उच्चारण करता है , यह मन्त्र उसे अपने शक्ति के प्रभाव से संसार के जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करता है।

धार्मिक दृष्टि से भी परब्रह्म के स्वरूप को नव और पवित्र माना गया है। अतः प्रणव मन्त्र के उपासक इस मन्त्र की उपासना से नया ज्ञान और शिव का स्वरूप पा लेते है। धर्म शास्त्रो में ओम नाम को साक्षात ईश्वर और महामंत्र माना गया है। ओम अक्षर में ब्रह्मा विष्णु तथा महेश तीनो एक साथ समाहित है अतः यह एकाक्षर ब्रह्म भी कहलाता है। ओम को गायत्री और वेदो का ज्ञान रूपी स्रोत माना गया है।

ओम के उच्चारण द्वारा व्यक्ति को मानसिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है तथा उसके मन और विचार में शुभ प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से , ओम का उच्चारण करते समय गले में कंपन पैदा होती है जो थाइराइड के उपचार के लिए सकरात्मक होती है। ओम के उच्चारण द्वारा व्यक्ति के फेफड़ो में शुद्ध वायु का प्रवाह होता है जो उसके शरीर के लिए लाभदायक है। ओम के प्रभाव से मनुष्य की मानसिक शांति के आलावा उसके हार्मोन व खून का दबाव भी नियंत्रित होता है जिस से मनुष्य के अंदर शुद्ध रक्त प्रवाह होने के कारण उसे कभी भी कोई बीमारी नही होती। यदि किसी व्यक्ति को घबराहट महसूस होती है तो उस आँखे बंद कर पांच मिनट ओम का उच्चारण करना चाहिए। ओम का उच्चारण व्यक्ति के शरीर के विषैले तत्वों को दूर कर उसे तनाव मुक्त करता है ।

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