ऐसे कर्म हों तो खराब किस्मत को भी बदला जा सकता है Aise karam ho to kharab kismat ko bhi badla ja sakta hai

एक बड़े ज्ञानी संत थे। उनका एक शिष्य था जो हमेशा उनके साथ रहता था।

एक दिन संत ने अपने शिष्य को बुलाकर कहा कि मैं कहीं दूर योग साधना के लिए जा रहा हूं। तुम्हारी गुरु मां अभी गर्भवती हैं। उन्हें जल्दी ही संतान प्राप्ति होने वाली है। तुम उनके पास ही रहो। जब भी मेरी संतान जन्म ले , तुम तत्काल उसकी कुंडली बना लेना ताकि उसका भविष्य देखा जा सके।

शिष्य ने गुरु की बात मान ली। संत चले गए। एक दिन गुरु मां को प्रसव पीड़ा हुई , उसने एक पुत्र को जन्म दिया। शिष्य ने तत्काल नक्षत्रों की गणना कर उसकी कुंडली तैयार की। पुत्र का भाग्य बहुत खराब था। उसके भाग्य में सिर्फ एक बोरी अनाज और एक पशु ही था। शिष्य को उसकी चिंता हुई। उसने अपने गुरु भाई के भविष्य को बचाने के लिए तप की ठानी।

वो जंगलों में निकल गया। कई साल बाद जब वो तप करके लौटा तो उसने देखा , जहां आश्रम था , वहां एक झोपड़ी है। उस झोपड़ी में उसके गुरु का वही पुत्र रहता है। बहुत गरीब था , सिर्फ एक बोरी अनाज और एक गाय उसके यहां थी। पत्नी और बच्चे भी कई बार भूखे रह जाते। शिष्य ने अपने गुरु भाई से कहा कि तुम ये अनाज और गाय बाजार में बेच आओ इससे जो धन मिले उससे गरीबों को भोजन कराओ।


गुरु के पुत्र ने कहा ऐसे तो मेरा जीवन बरबाद हो जाएगा। ये एक बोरी अनाज और गाय ही तो मेरी गृहस्थी का आधार है। संत ने कहा कुछ नहीं होगा। मैं जैसा कहता हूं वैसा करो। गुरु भाई ने ऐसा ही किया। अगले दिन फिर उसके घर के आंगन में एक गाय और एक बोरी अनाज बंधा था। संत ने फिर उससे वही करने को कहा। फिर तो ये रोज का सिलसिला बन गया। धीरे-धीरे गुरु भाई की आर्थिक स्थिति सुधरती गई।


संत ने उसे समझाया कि एक बोरी अनाज और गाय तो तुम्हारे भाग्य में था ही , वो तो तुम खर्च करते तो फिर कहीं से मिल ही जाता। इसे बेचकर तुमने गरीबों को भोजन कराया तो तुम्हारे पुण्य बढऩे लगे , इससे तुम्हारे भाग्य के दोष कम हो गए।


हम भी अक्सर किस्मत के लिखे को ही अंतिम सत्य मानकर बैठ जाते हैं। कभी अपने भाग्य को बदलने का प्रयास नहीं करते। अगर प्रयास किया जाए तो भाग्य को भी अपने कर्मों से बदला जा सकता है। हमें अगर कोई भविष्य बताए तो उसे ही सत्य मानकर ना जीएं , उसमें अपने कर्मों को शामिल करें। अच्छे कर्मों से भाग्य भी बदला जा सकता है।

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