समय का नाम ही जीवन है samay ka naam hi jeevan hai

जीवन का महल समय की – घण्टे – मिनटों की ईंटों से चुना गया है। यदि हमें जीवन से प्रेम है तो यही उचित है कि समय को व्यर्थ नष्ट न करें। मरते समय एक विचारशील व्यक्ति ने अपने जीवन के व्यर्थ ही चले जाने पर अफसोस प्रकट करते हुए कहा – ‘‘ मैंने समय को नष्ट किया , अब समय मुझे नष्ट कर रहा है। ’
खोई दौलत फिर कमाई जा सकती है। भूली हुई विद्या फिर याद की जा सकती है। खोया हुआ स्वास्थ्य चिकित्सा द्वारा लौटाया जा सकता है , पर खोया हुआ समय किसी प्रकार नहीं लौट सकता , उसके लिए केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है।

जिस प्रकार धन के बदले में अभीष्ट वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं , उसी प्रकार समय के बदले में विद्या , बुद्धि , लक्ष्मी , कीर्ति , आरोग्य , सुख-शान्ति , मुक्ति आदि जो भी वस्तू रुचिकर हो खरीदी जा सकती है।

ईश्वर ने समय रूपी प्रचुर धन देकर मनुष्य को पृथ्वी पर भेजा है और निर्देश दिया है कि वह इसके बदले में संसार की जो भी वस्तु रुचिकर समझे खरीद ले।
किन्तु कितने व्यक्ति हैं जो समय का मूल्य समझते और उसका सदुपयोग करते हैं ?
अधिकांश लोग आलस्य और प्रमाद में पड़े हुए जीवन के बहुमूल्य क्षणों को यों ही बर्बाद करते रहते हैं। एक-एक दिन करके सारी आयु व्यतीत हो जाती है और अन्तिम समय वे देखते है कि उन्होंने कुछ भी प्राप्त नहीं किया , जिन्दगी के दिन यों ही बिता दिये।

इसके विपरीत जो जानते हैं कि समय का नाम ही जीवन है वे एक एक क्षण को कीमती मोती की तरह खर्च करते हैं और उसके बदले में बहुत कुछ प्राप्त कर लेते हैं।

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