जब व्यक्ति दूसरे के दु:ख को अपना समझ लेता है तभी असली दया का जन्म होता है Jab vyakti dusre ke dukh ko apna samajh leta hai tabhi asali Daya ka janm hota hai

एक लड़का रास्ते पर खड़ा था और वहां से निकलने वाली हर कार को हाथ हिला-हिलाकर आवाजें लगा- लगाकर रोकने की कोशिश कर रहा था। पर कोई भी कार रोक ही नहीं रहा था।

आखिर उससे रहा न गया , उसने पत्थर उठाया और अगली आने वाली कार के कांच पर मार दिया। कांच फूट गया। कार चलाने वाला गुस्से से भर गया। उसने गाड़ी रोकी , वह जल्दी में था , अपने बच्चों को लेने जा रहा था और यहां उसकी कार के शीशे को तोड़ दिया गया।

वह नीचे उतरा , उस बच्चे को पकड़ा और जोरदार पिटाई कर दी। चिल्लाया – बदतमीज , तूने मेरी नई कार का शीशा तोड़ दिया। लड़के ने रोते हुए कहा – सर , आप मुझे भले ही मार ले , मेरा इरादा आपकी कार को नुकसान पहुंचाने का नहीं था , मैं तो बस आपकी कार रोकना चाहता था। उसने पूछा – किस लिए रोकना था ?

बच्चे ने बताया सड़क की दूसरी ओर एक घायल लड़का पड़ा है। अगर उसे मदद न मिली तो वह मर जाएगा। मैंने कई कार वालों को रोकने की कोशिश की पर कोई रुका ही नहीं। मेरे पास कार रोकने के लिए इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा था। सर आप मुझे मारने लें पर कृपा कर उस बच्चे को अस्पताल पहुंचा दें।

उस आदमी को गुस्सा आया हुआ था , वह कार में बैठा और जैसे ही दरवाजा बंद करने लगा कि उस लड़के ने अपना हाथ फंसा दिया। उसका हाथ लहूलुहान हो गया। वह दरवाजा बंद न कर पाया , मजबूर होकर वह बाहर निकला।

उस लड़के ने कार मालिक के पैरों में गिर कर कहा , सर मैं नहीं जानता कि वह लड़का कौन है , मेरा उससे कोई स्वार्थ भी नहीं है – वह मर जाएगा , आप मदद कर दीजिए।

कार मालिक को तभी उस लड़की की आह की , कराह की आवाज सुनाई दी। वह चौंका , क्योंकि यह आवाज तो उसके अपने बेटे की जैसी लगी। वह दौड़कर उसके पास पहुंचा। वहां देखा तो वह उसका अपना ही लड़का था। तुरंत कार में डाला गया , अस्पताल लेकर गए।

वहां खून की जरूरत आ पड़ी। पिता का ब्लड ग्रुप बच्चे से न मिल सका। तब उस लड़के ने अपना खून देने की पेशकश की कि वह तो नहीं जानता कि यह लड़का कौन है पर अगर उसका खून काम आ सके तो वह देने को तैयार है।

उसके खून की जांच हुई , ग्रुप मिल गया। अब उस लड़के का खून घायल लड़के को चढ़ाया गया। इधर का खून उधर जा रहा था। तभी कार मालिक ने सोचा कि आज मैंने नई कार खरीदी थी , उसी खुशी में लड़के को लेने जा रहा था कि सबसे पहले अपने बेटे को चढ़ाएगा पर अब यह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि जब वह यहां से निकले तो अपनी कार में किसे पहले बिठाए अपने बेटे को या बेटे की जान बचाने वाले लड़के को।

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