कोठी का दान kothi ka daan

मुल्ला नसरुद्दीन हज की यात्रा पर गया। यात्रा के भाव तो थे नहीं , बस गांव के लोगों ने प्रेरित कर दिया तो रवाना हो गया। हज कर लिया।

वापसी के समय पानी के जहाज से आ रहा था कि अचानक समुद्र में तूफान उठा। तूफान इतना तीव्र था कि सभी ने जीने की आशा छोड़ दी। मरता क्या न करते। सभी अल्लाह को याद करने लगे। मुल्लाने भी देखा अब मरना ही है तो उसने घोषणा की कि हे खुदा ! अगर मैं बच गया तो मैंने जो नौ लाख की अटारी बनवाई है वह तुम्हारे नाम कर दूंगा

सभी बहुत आश्चर्य से भर गए कि मुल्ला जिसने कभी कौड़ी भी दान में न‌ दी वह खुदा के नाम पर नौ लाख की कोठी कुर्बान करने को तैयार हो गया और उसने सोचा कि बचने वाले तो है नहीं , घोषणा तो कर ही दो। पर किस्मत अच्छी कहिए कि तूफान शांत हो गया और जहाज बच गया।

अब नसरुद्दीन घबराया , क्योंकि सैकड़ों लोगों के सामने घोषणा की जा चुकी थी। व्यक्ति अगर भीतर – भीतर घोषणा करें तो दबा कर भी रखी जा सकती है और समाज के बीच मंच में घोषणा कर दी जाए , तो न देने की इच्छा होने पर भी शर्म के कारण देना पड़ जाए।

मुल्ला का भी यही हाल हो गया। सोचने लगा , इससे तो जहाज डूब जाता तो अच्छा रहता , कम से कम नौ लाख का महल तो दान नहीं देना पड़ता। फंस गया बेचारा। जहाज के यात्रियों ने गांव पहुंचकर खबर फैला दी कि मुल्ला खुदा के नाम पर अपनी नौ लाख की अटारी दान कर रहा है।

रोज लोग आते , उसे उकसाते और कहते अपनी कोठी दान में कब दे रहे हो। नसरुद्दीन ने सोचा , बुरे फंसे। अब कोई ना कोई रास्ता तो निकालना ही पड़ेगा। फिर एक घोषणा की कि वह अपनी कोठी नीलाम कर देगा और जितना पैसा आएगा वह दान कर देगा। सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए यह जानकर कि मुल्ला कोठी बेचकर सारा पैसा दान कर देगा।

गांव के लोग मुल्ला की कोठी के सामने इकट्ठे हो गए। नीलामी की बोली शुरू हो गई तभी नसरुद्दीन बोला , रुको मेरी एक शर्त है , मेरे पास एक बिल्ली है और इसकी कीमत है नौ लाख रुपए। यह कोठी तो सिर्फ एक रुपए की है और शर्त यही है कि जो इस बिल्ली को खरीदेगा कोठी उसी को दी जाएगी।

खैर , बहुत तरह के लोग होते हैं फंस गए मुल्ला की चालबाजी में। बोली लगी , नौ लाख में बिल्ली और एक रुपए में कोठी बिक गई। मुल्ला ने असली रंग दिखाया , मैंने खुदा के नाम पर कोठी दान की थी बिल्ली नहीं , इसीलिए मकान का जो एक रूपया आया है उसे खुदा के नाम पर दान देता हूं और नौ लाख……। उसकी जेब में पहुंच गए।

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