धर्म की प्यास Dharm ki pyas

एक संत साधना में ही समय पूरा बिताते थे। गांव वालों ने विनंती कि हमारा गांव पवित्र करो हमें आपकी अमृतवाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त कराओ। तब मुनिराज पधारे गांव।
गांव वाले ने विनंती की प्रवचन का समय बताये। तब मुनिराज ने कहा मुझे साधना से समय नहीं मिलता इसीलिए रविवार को प्रवचन दूंगा। तब सारी जनता रविवार को इंतजार करती है। इतने बड़े भगवंत का व्याख्यान सुनने की ललक प्यास सभी में थी। रविवार आ गया मुनिराज भी प्रवचन देने आ गये, जनता भी खूब आई!
प्रवचन शुरू करने से पहले मुनिराज ने एक प्रश्न किया कहा मेरे प्रश्न का जवाब दोगे बाद में प्रवचन दूंगा। प्रश्न पूछा – परमात्मा है कि नहीं ?
सभी ने जवाब दिया जोर से एक साथ परमात्मा है ! सब जगह परमात्मा है। तब संत ने कहा जब तुम सब जानते हो परमात्मा है तो फिर मुझे कुछ कहने की आवश्यकता है नहीं ! उठकर अपने स्थान पर चले जाते हैं।
सारी जनता जो प्रवचन सुनने की ललक में थी वह उदास हो जाती है तब सब मीटिंग करते हैं, अब सब कहना परमात्मा नहीं है। समय बीता दूसरा रविवार आया फिर वही पूछा परमात्मा है कि नहीं ?
सभी ने एक साथ कहा परमात्मा नहीं है, तब संत ने कहा जब परमात्मा नहीं है तो उपदेश देने का क्या फायदा है। संत वापस लौट जाते हैं।
जनता सभी मिलकर तय करती है इस बार आधे जने हां बोलेंगे, आधे जने ना बोलेंगे ? तीसरा रविवार आया फिर सब प्रवचन सुनने आये। फिर वही प्रश्न पूछा परमात्मा है कि नहीं ? तब आधे जनों ने कहा परमात्मा है! आधे जनों ने कहा परमात्मा नहीं है! तब मुनिराज कहते हैं जिसके लिए परमात्मा है उसे कुछ कहने की जरूरत नहीं। जिसके लिए परमात्मा नहीं है उसे उपदेश सुनाने का फायदा नहीं है, संत फिर उठकर चले जाते हैं।
जनता सब सोच में पड़ गई अब क्या करें, जिससे प्रवचन सुन सके! तब सभी ने अपना दिमाग लगाया कहा इस बार कोई कुछ भी जवाब नहीं देगा ?
चौथा रविवार आया अब सबको प्रवचन सुनने की जबरदस्त प्यास लगी है। संत आए फिर वही परमात्मा है कि नहीं ?
तब सब मौन हो गये बड़ा आदमी उठकर बोला हम नहीं जानते हैं कि परमात्मा है कि नहीं!
आप ही बताओ, तब संत ने कहा खाली घड़े को भरा जा सकता है भरे घड़े में डालोगे तो बाहर ही निकलेगा ? इतने दिन तुम सब भरे हुए थे अब खाली रिक्त हो गये हो।
तब मुनिराज ने प्रवचन देना प्रारंभ किया।
पेट में बिल्कुल जगह नहीं है खाना ठूंस ठूंस खाया फिर प्यास लगी तो पानी सामने हैं फिर भी पी नहीं सकोगे, क्योंकि पेट भरा हुआ है। प्यास तो लगी है पर जगह नहीं है। उसी तरह धर्म की प्यास तो लगी है पर पहले से अंदर कचरा भरा हुआ है। तो कितना भी श्रवण करोगे अंदर जाने वाला नहीं है, उसके लिए खुद को खाली करना होगा फिर जिनवाणी श्रवण करोगे तो अंदर प्रवेश करेगी।

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