हनुमान से सीखें ये सबसे महत्वपूर्ण संस्कार… Hanuman se sikhen yah sabse mahatvpurn sanskar

दूसरे का मान रखते हुए हम सम्मान अर्जित कर लें , इसमें गहरी समझ की जरूरत है। होता यह है कि जब हम अपनी सफलता , सम्मान या प्रतिष्ठा की यात्रा पर होते हैं , उस समय हम इसके बीच में आने वाले हर व्यक्ति को अपना शत्रु ही मानते हैं। महत्वाकांक्षा पूरी करने के… अधिक पढ़ें हनुमान से सीखें ये सबसे महत्वपूर्ण संस्कार… Hanuman se sikhen yah sabse mahatvpurn sanskar

मन ही माया है Man hi Maya hai

मन से मुक्त हो जाना ही संन्यास है। इसके लिए पहाड़ों पर या गुफाओं में जाने की कोई जरूरत नहीं है। दुकान में , बाजार में , घर में.. हम जहां भी हों , वहीं मन से छूटा जा सकता है..। संत लाख कहें कि संसार माया है , लेकिन सौ में से निन्यानबे संत… अधिक पढ़ें मन ही माया है Man hi Maya hai

रिश्ते की बुनियाद ही प्रेम है rishte ki buniyad hi prem hai

प्रेम नहीं हो तो रिश्तों में दूसरा कोई भाव अपना असर नहीं दिखाएगा। अगर मामला निजी संबंधों का हो तो उसमें अधिक सावधानी रखना होती है। हमारे सबसे करीबी संबंधों में जीवनसाथी सबसे ऊपर होता है। इस रिश्ते की बुनियाद ही प्रेम है। प्रेम हो यह अच्छा है, लेकिन प्रेम को भी नयापन चाहिए। एक… अधिक पढ़ें रिश्ते की बुनियाद ही प्रेम है rishte ki buniyad hi prem hai

व्यसन कोई भी ऐसा नहीं जिसे छोड़ा ना जा सके vyasan koi bhi aisa Nahin jise chhoda Na ja sake

एक समय शराब का एक व्यसनी एक संत के पास गया और विनम्र स्वर में बोला , ‘ गुरूदेव , मैं इस शराब के व्यसन से बहुत ही दु:खी हो गया हूँ। इसकी वजह से मेरा घर बरबाद हो रहा है। मेरे बच्चे भूखे मर रहे हैं , किन्तु मैं शराब के बगैर नही रह… अधिक पढ़ें व्यसन कोई भी ऐसा नहीं जिसे छोड़ा ना जा सके vyasan koi bhi aisa Nahin jise chhoda Na ja sake

कर्म Karma

सफलता के साथ शांति चाहिए तो अपने लिए भी जीएं । आज आप कितना भी काम कर लीजिए , लेकिन शाम को घर लौटते समय एक बेचैनी साथ लेकर ही जाएंगे। काम बहुत कर रहे हैं लेकिन संतुष्टि नहीं है। लोग सफलता की अंधी दौड़ में दौड़ तो रहे हैं , मनचाहा पैसा भी कमा… अधिक पढ़ें कर्म Karma

समय ही ऐसा पदार्थ है जो एक निश्चित मात्रा में मनुष्य को मिलता है samay hi aisa padarth hai jo ek nishchit matra mein manushya ko milta hai

समय का सदुपयोग करना सीखें समय जितना कीमती और फिर न मिलने वाला तत्व है उतना उसका महत्व प्रायः हम लोग नहीं समझते। हममें से बहुत से लोग अपने समय का सदुपयोग बहुत ही कम करते हैं। आज का काम कल पर टालते और उस बचे हुए समय को व्यर्थ की बातों में नष्ट करते… अधिक पढ़ें समय ही ऐसा पदार्थ है जो एक निश्चित मात्रा में मनुष्य को मिलता है samay hi aisa padarth hai jo ek nishchit matra mein manushya ko milta hai

औसत आदमी इस भ्रमण चक्र में निरत रहकर दिन गुजार देता है। Ausat aadami is Brahman chakra mein nirath rahakar din gujar deta hai

समय का सदुपयोग करना सीखें जीवन क्या है? इसका उत्तर एक शब्द में अपेक्षित हो तो कहा जाना चाहिए — ‘ समय ’। समय और जीवन एक ही तथ्य के दो नाम हैं। कोई कितने दिन जिया ? इसका उत्तर वर्षों की काल गणना के रूप में ही दिया जा सकता है। समय की सम्पदा… अधिक पढ़ें औसत आदमी इस भ्रमण चक्र में निरत रहकर दिन गुजार देता है। Ausat aadami is Brahman chakra mein nirath rahakar din gujar deta hai

एक गिलहरी बनी भगवान गौतम बुद्ध की प्रेरणास्त्रोत ek gilhari Bani bhagwan Gautam buddh ki prerna strot

एक बार महात्मा बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के लिए घोर तप कर रहे थे। उन्होंने अपने शरीर को काफी कष्ट दिया , घने जंगलों में कड़ी साधना की , पर आत्म ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई। एक दिन निराश होकर बुद्ध सोचने लगे , ‘‘ मैंने अभी तक कुछ भी प्राप्त नहीं किया अब आगे क्या… अधिक पढ़ें एक गिलहरी बनी भगवान गौतम बुद्ध की प्रेरणास्त्रोत ek gilhari Bani bhagwan Gautam buddh ki prerna strot

हम सभी आशा पर जीते हैं ham sabhi Asha per jite Hain

सभी भिक्षु एकत्र थे। परस्पर चर्चा के दौरान एक ने कहा , ‘ सारा नगर बुद्ध के प्रवचन में उपस्थित हुआ है , लेकिन राजपुरोहित कट्टरपंथी है , इसीलिए वह कभी भी प्रवचन सभा में नहीं आया है । हमें ऐसी कोशिश करनी चाहिए ताकि राजपुरोहित अह्रत् की सन्निधि में उपस्थित हो। ‘ कोई कुछ… अधिक पढ़ें हम सभी आशा पर जीते हैं ham sabhi Asha per jite Hain

निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

महात्मा बुद्ध एक गाँव में ठहरे हुए थे। वे प्रतिदिन शाम को वहाँ पर सत्संग करते थे। भक्तों की भीड़ होती थी , क्योंकि उनके प्रवचनों से जीवन को सही दिशा बोध प्राप्त होता था। बुद्ध की वाणी में गजब का जादू था। उनके शब्द श्रोता के दिल में उतर जाते थे। एक युवक प्रतिदिन… अधिक पढ़ें निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain