कर्म करो तभी मिलेगा karam karo tabhi milega

कौरवों की राजसभा लगी हुई है। एक ओर कोने में पाण्डव भी बैठे हैं। दुर्योधन की आज्ञा पाकर दुःशासन उठता है और द्रौपदी को घसीटता हुआ राजसभा में ला रहा है। आज दुष्टों के हाथ उस अबला की लाज लूटी जाने वाली है। उसे सभा में नंगा किया जाएगा। वचनबद्ध पाण्डव सिर नीचा किए बैठे… अधिक पढ़ें कर्म करो तभी मिलेगा karam karo tabhi milega

सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

दार्शनिक मौलुंकपुत्र तथागत बुद्ध के पास गया और पूछा , ‘ क्या ईश्वर है ? बुद्ध ने कहा , ‘ तुम्हारे प्रश्न का उत्तर अवश्य दूंगा , पर पहले यह बताओ कि यह तुम्हारी बौध्दिक उपज है या सत्य जानने का प्रयास। ‘ मौलुंकपुत्र ने कहा , ‘ बौद्धिक खुजलाहट बहुत कर चुका हूं। अब… अधिक पढ़ें सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

इंद्रभूति गौतम तीर्थंकर महावीर के परम शिष्य थे। महावीर प्राय: उन्हें कहा करते थे , ‘ शिष्य , होश संभालो। ‘ गौतम के लिए महावीर सर्वोपरि थे। एक क्षण के लिए भी महावीर का त्याग उनके लिए असहनीय था। परमात्मा से प्रेम किया जाता है , पर गौतम ने तो राग – श्रृंखलाएं निर्मित कर… अधिक पढ़ें गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

तीर्थंकर महावीर कुमारग्राम के बाहर ध्यानस्थ थे। वही एक ग्वाला आया। महावीर के निकट पहुंचकर उसने अपनी गायों को गिना तो दो गायें कम थी। उसने ध्यानस्थ महावीर से कहा , ‘ साधो ! मेरी दो गायें पीछे छूट गई है। मैं उन्हें लेने जाता हूं। जरा इन गायों का ध्यान रखना।’ महावीर से बिना… अधिक पढ़ें परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

अमृत नहीं बांट सकते तो विष फैलाने का अधिकार तुम्हें किसने दिया ? Amrit Nahin bant sakte to Vish failane Ka adhikar tumhen kisne Diya ?

अह्रतृ महावीर उत्तर वाचाल की ओर जा रहे थे। मार्ग में दो पगडण्डियां आयीं। ग्रामीणों ने बताया , ‘ यह वह पगडंडी है जो सीधी उत्तर वाचाल पहुंचती है और दूसरी घूमकर । लेकिन आप दूसरी पगडंडी पर जाएं , क्योंकि छोटी पगडंडी के मार्ग में महाविषधर सर्प रहता है । जहां उस नागराज का… अधिक पढ़ें अमृत नहीं बांट सकते तो विष फैलाने का अधिकार तुम्हें किसने दिया ? Amrit Nahin bant sakte to Vish failane Ka adhikar tumhen kisne Diya ?

लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

अभिनिष्क्रमण से पूर्व जब तीर्थंकर महावीर वर्षी दान दे रहे थे , तब सोमभट्ट ब्राह्मण जीविकोपार्जन के लिए विदेश गया हुआ था , पर भाग्य का मारा वह खाली हाथ लौटा। पत्नी ने कहा , ‘ अब क्या आए हो ! जब यहां धन लूटा रहे थे महावीर , तब तुम बाहर थे और जब… अधिक पढ़ें लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

ऋषभ के साथ आमोद – प्रमोद करने के लिए देव- देवेंद्र- विद्याधर आया करते थे। आज ऋषभ का जन्म – दिवस था। स्वयं देवेंद्र देवलोक की नृत्यांगना नीलांजना के साथ ऋषभ को बधाई देने पहुंचे थे। ऋषभ और देवेंद्र अपने मित्रों और सहचरों के साथ नीलांजना का भावविभोर नृत्य देख रहे थे। देवेंद्र ने देखा… अधिक पढ़ें कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.

महाराज शीलभद्र वन – उपवनों में होते हुए तीर्थयात्रा के लिए जा रहे थे। रात्रि को उन्होंने एक आश्रम के निकट अपना पड़ाव डाला। आश्रम में आचार्य दम्पत्ति अपने कुछ शिष्यों के साथ निवास करते थे। शिष्यों का शिक्षण , ईश्वर आराधना , जीवन निर्वाह के लिए शरीर श्रम , इन्हीं में आश्रमवासियों का दिनभर… अधिक पढ़ें स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.

महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

महाभारत युद्ध समाप्ति की ओर था , युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया। अपनी आखरी सांसे ले रहा दुर्योधन अश्वत्थामा से बोला की तुम यह कार्य निति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक पर मुझे पांचो पांडवो का कटा हुआ शीश देखना है। दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने… अधिक पढ़ें महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

कैसे प्राप्त हुई रावण को सोने की लंका ? Kaise prapt Hui Ravan ko sone ki Lanka ?

रावण के सोने का महल धन सम्पदा से परिपूर्ण था पर क्या आप जानते है की रावण को ये सोने की लंका कैसे प्राप्त हुई । पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन कुबेर जो महान समृद्धि से युक्त थे वो अपने पिता के साथ बैठे थे। रावण ने जब कुबेर को देखा तो उसके मन… अधिक पढ़ें कैसे प्राप्त हुई रावण को सोने की लंका ? Kaise prapt Hui Ravan ko sone ki Lanka ?