जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

एक बार सभी देवता नारद के विषय में चर्चा कर रहे थे। वे सभी नारद जी के बिना बुलाये कहीं भी बार – बार आ जाने को लेकर बहुत परेशान थे। उन्होंने निश्चय किया की वे अपने द्वारपालों से कहकर नारद जी को किसी भी दशा में अंदर प्रवेश नही करने देंगे और किसी न किसी बहाने से उन्हें टाल देंगे।… अधिक पढ़ें जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

राजा होने के कारण देवराज इंद्र को अपने आप पर बहुत घमंड आ चूका था तथा अन्य देवताओ को वे अपने समक्ष तुच्छ समझते थे। अपनी राजगद्दी को भी लेकर वे इतने आशंकित रहते थे की यदि कोई ऋषि मुनि तपश्या में बैठे तो वे आतंकित हो जाते थे , कहीं वो वरदान में त्रिदेवो से इन्द्रलोक का सिहासन ना मांग ले। ऐसे ही… अधिक पढ़ें शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

पृथ्वी पर सर्वप्रथम श्राद्ध प्रथा इन्होंने ही शुरू की prithvi per sarvpratham shraddh pratha unhone hi shuru ki

हिन्दू धर्म में हर संतान के लिए यह परम कर्तव्य माना गया है की वह अपने पिता या पूर्वजो  को तृप्त करने के लिए श्राद्ध अवश्य करे। श्राद्ध के समय पितृलोक  से पूर्वज भोजन की आशा में पृथ्वी लोक अपने पुत्र वंशजो के पास आते है तथा श्राद्ध के रूप में हम जो प्रसाद ब्राह्मण , गाय ,… अधिक पढ़ें पृथ्वी पर सर्वप्रथम श्राद्ध प्रथा इन्होंने ही शुरू की prithvi per sarvpratham shraddh pratha unhone hi shuru ki

भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी उसकी पुकार bhagwan Shri Krishna ne suni uski pukar

कौरवों और पाण्डवों की सेनाएँ आमने – सामने आ गईं। शंख बजने लगे , घोड़े खुरों से जमीन खूँदने और हाथी चिंघाड़ने लगे। कुरुक्षेत्र के समरांगण में सर्वनाश की तैयारी पूरी हो चुकी थी। ठीक तभी एक टिटहरी का आर्तनाद गूँज उठा।दोनों शिविरों के मध्य एक छोटी सी टेकरी थी , उसी की खोह में… अधिक पढ़ें भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी उसकी पुकार bhagwan Shri Krishna ne suni uski pukar

आत्म परीक्षण का ज्ञान Atma parikshan ka Gyan

एक दिन बुद्ध प्रातः भिक्षुओं की सभा में पधारे। सभा में प्रतीक्षारत उनके शिष्य यह देख चकित हुए कि बुद्ध पहली बार अपने हाथ में कुछ लेकर आये थे। उनके हाथ में एक रूमाल था। बुद्ध के हाथ में रूमाल देखकर सभी समझ गए कि इसका कुछ विशेष प्रयोजन होगा। बुद्ध अपने आसन पर विराजे।… अधिक पढ़ें आत्म परीक्षण का ज्ञान Atma parikshan ka Gyan

मृत्यु आती है तो कोई परिजन आदि काम नहीं आते mrutyu aati hai to koi parijan adhik kam nahin aata

पतचरा श्रावस्ती के नगरसेठ की पुत्री थी। किशोरवय होने पर वह अपने घरेलू नौकर के प्रेम में पड़ गई। जब उसके माता – पिता उसके विवाह के लिए उपयुक्त वर खोज रहे थे तब वह नौकर के साथ भाग गई। दोनों अपरिपक्व पति – पत्नी एक छोटे से नगर में जा बसे। कुछ समय बाद… अधिक पढ़ें मृत्यु आती है तो कोई परिजन आदि काम नहीं आते mrutyu aati hai to koi parijan adhik kam nahin aata

पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

   राजा शर्याति अपने परिवार समेत एक बार वन विहार के लिए गए। एक सुरम्य सरोवर के निकट पड़ाव पड़ा। बच्चे इधर – उधर खेल , विनोद करते हुए घूमने लगे। मिट्टी के ढेर के नीचे से दो तेजस्वी मणियाँ जैसी चमकती देखीं तो राजकन्या को कुतूहल हुआ। उसने लकड़ी के सहारे उन चमकती वस्तुओं… अधिक पढ़ें पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

कर्ण जैसा दानवीर नहीं। Karan jaisa danvir nahin.

दानवीरों की चर्चा में एक बार कृष्ण पांडवों से बोले – ‘ मैंने कर्ण जैसा दानवीर नहीं देखा और न ही सुना । ‘ पांडवों को यह बात पसंद नहीं आयी। भीम ने पूछ ही लिया – ‘ कैसे ? ‘ कृष्ण ने कहा – ‘ समय आने पर बतलाऊंगा।‘ बात आई – गई हो… अधिक पढ़ें कर्ण जैसा दानवीर नहीं। Karan jaisa danvir nahin.

एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.

एक बार महात्मा बुद्ध किसी गांव में गए। वहां एक स्त्री ने उनसे पूछा कि आप तो किसी राजकुमार की तरह दिखते हैं , आपने युवावस्था में गेरुआ वस्त्र क्यों धारण किया है ? बुद्ध ने उत्तर दिया कि मैंने तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए संन्यास लिया है। बुद्ध ने कहा – हमारा… अधिक पढ़ें एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.

बीते हुए कल के कारण आज और भविष्य को मत बिगाड़ो beete hue kal ke Karan aaj aur bhavishya ko mat bigado

बुद्ध भगवान एक गाँव में उपदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि “ हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए। क्रोध ऐसी आग है जिसमें क्रोध करनेवाला दूसरोँ को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा। ” सभा में सभी शान्ति से बुद्ध की वाणी सून रहे थे , लेकिन वहाँ… अधिक पढ़ें बीते हुए कल के कारण आज और भविष्य को मत बिगाड़ो beete hue kal ke Karan aaj aur bhavishya ko mat bigado