महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि ‘ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा , साथ ही दूरस्थ… अधिक पढ़ें महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

महाभारत युद्ध समाप्ति की ओर था , युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया। अपनी आखरी सांसे ले रहा दुर्योधन अश्वत्थामा से बोला की तुम यह कार्य निति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक पर मुझे पांचो पांडवो का कटा हुआ शीश देखना है। दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने… अधिक पढ़ें महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

जहां धर्म है वहां पर ही विजय हैं jahan dharm hi vahan per hi Vijay hi

रूपनगर में एक दानी और धर्मात्मा राजा राज्य करता था। एक दिन उनके पास एक साधु आया और बोला , ‘ महाराज ,आप बारह साल के लिए अपना राज्य दे दीजिए या अपना धर्म दे दीजिए। ‘ राजा बोला ,’ धर्म तो नहीं दे पाऊंगा। आप मेरा राज्य ले सकते है। ‘ साधु राजगद्दी पर… अधिक पढ़ें जहां धर्म है वहां पर ही विजय हैं jahan dharm hi vahan per hi Vijay hi

सच्चे हृदय से की गई साधना कभी निष्फल नहीं होती। Sacchi hriday se ki gai Sadhna kabhi nishfal nahin Hoti.

बहुत पुरानी बात है। हस्तिनापुर के जंगल में दो साधक अपनी नित्य साधना में लीन थे। उधर से एक देवर्षि का प्रकट होना हुआ। देवर्षि को देखते ही दोनों साधक बोल उठे – ‘ परमात्मन ! आप देवलोक जा रहे हैं क्या ? आप से प्रार्थना है कि लौटते समय प्रभु से पूछिए कि हमारी… अधिक पढ़ें सच्चे हृदय से की गई साधना कभी निष्फल नहीं होती। Sacchi hriday se ki gai Sadhna kabhi nishfal nahin Hoti.

“ ऐसी दशा हो भगवन जब प्राण तन से निकले… ” “ aisi dasha ho bhagwan jab pran tan se nikale… ”

“ ऐसी दशा हो भगवन जब प्राण तन से निकले… ” यह स्तवन तो सुना ही होगा ! पर कभी विचार किया है की जीवन के अंतिम समय में भगवन की भक्ति और धार्मिक प्रवत्ति अनिवार्य क्यों बताई जाती है ? आज आपको बताते हैं की जो आज हमारे मित्र और शत्रु हैं दरअसल उनका और… अधिक पढ़ें “ ऐसी दशा हो भगवन जब प्राण तन से निकले… ” “ aisi dasha ho bhagwan jab pran tan se nikale… ”

दुनिया का हर धर्म इंसान को इंसान से जोड़ने का काम करता है। Duniya Ka har dharm insan ko insan se jodne ka kam karta hai.

महाभारत में लिखा है – ‘ धर्मो रक्षति रक्षित:। ‘ मनुष्य धर्म की रक्षा करे तो धर्म भी उसकी रक्षा करता है। यह विनियम का सिद्धांत है। संसार में ऐसा व्यवहार चलता है। भौतिक सुख की चाह में लोग धर्म की ओर प्रवृत्त होते हैं। कुछ देने की मनौतियां – वायदे होते हैं , स्वार्थो… अधिक पढ़ें दुनिया का हर धर्म इंसान को इंसान से जोड़ने का काम करता है। Duniya Ka har dharm insan ko insan se jodne ka kam karta hai.

गुरु ने शिष्य को आत्मा का साक्षात्कार करवाया । Guru ne shishya ko aatma ka sakshatkar karvaya.

एक शिष्य अपने आचार्य से आत्मसाक्षात्कार का उपाय पूछा। पहले तो उन्होंने समझाया बेटा यह कठिन मार्ग है , कष्ट क्रियाएँ करनी पड़ती हैं। तू कठिन साधनाएँ नहीं कर सकेगा , पर जब उन्होंने देखा कि शिष्य मानता नहीं तो उन्होंने एक वर्ष तक एकांत में गायत्री मंत्र का निष्काम जाप करके अंतिम दिन आने… अधिक पढ़ें गुरु ने शिष्य को आत्मा का साक्षात्कार करवाया । Guru ne shishya ko aatma ka sakshatkar karvaya.

आत्मा का साक्षात्कार aatma ka sakshatkar

हेलो दोस्तों,आप मुझे पहचानते हो ?शायद हां भी हो सकता है….नहीं भी हो सकता है…..क्या !आप अपने आप को पहचानते हो….. इसका जवाब आप हां में ही दोगे।अपने बारे में क्या जानते हैं ?यही ना कि……आपका नाम क्या है ?आपके माता-पिता का नाम क्या है ?आपके दादा-दादी का नाम क्या है ?आप किस धर्म को… अधिक पढ़ें आत्मा का साक्षात्कार aatma ka sakshatkar

धर्म कार्य कब करना ? आज… आज… और… अभी dharm karya kab karna ? aaj… aaj… aur… abhi

एक राजा था , उसकी एक रानी , एक पुत्री और एक दासी थी । जैनधर्म के रंग (प्रभाव) में रंगा यह पूरा परिवार वैरागी था , यहाँ तक कि दासी भी वैराग्य में जागृत थी । एक बार किसी प्रसंग पर राजा वैराग्य पूर्वक कहता है कि – ” हे जीव ! तू शीघ्र… अधिक पढ़ें धर्म कार्य कब करना ? आज… आज… और… अभी dharm karya kab karna ? aaj… aaj… aur… abhi

हनुमान चालीसा और उसके हर पद का अर्थ जानना जरूरी है। Hanuman chalisa aur uske har pad ka arth Janna jaruri hai.

* हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया। * क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं ? बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो। तो लीजिए… अधिक पढ़ें हनुमान चालीसा और उसके हर पद का अर्थ जानना जरूरी है। Hanuman chalisa aur uske har pad ka arth Janna jaruri hai.