आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

 किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था। परमात्मा में आस्था रखने वाला था । वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में नहाने जाया करता था। नहा धो कर पूजा पाठ किया करता था। रोज की तरह वह एक दिन गंगा में नहाने गया नहा… अधिक पढ़ें आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

मां ने दिया अद्भुत शिक्षाप्रद ज्ञान maa ne Diya adbhut shikshaprad gyan

राजा गोपीचंद का मन गुरु गोरखनाथ के उपदेश सुनकर सांसारिकता से उदासीन हो गया। मां से अनुमति लेकर गोपीचंद साधु बन गए। साधु बनने के बहुत दिन बाद एक बार वह अपने राज्य लौटे और भिक्षापात्र लेकर अपने महल में भिक्षा के लिए आवाज लगाई। आवाज सुन उनकी मां भिक्षा देने के लिए महल से… अधिक पढ़ें मां ने दिया अद्भुत शिक्षाप्रद ज्ञान maa ne Diya adbhut shikshaprad gyan

संकट में मातृभाषा ही काम देती है। Sankat mein matrubhasha hi Kam deti hai.

यह उन दिनों की कथा है , जब गोपाल भांड बंगाल के राजदरबार के एक प्रमुख सदस्य थे। अपने विनोदी स्वभाव से न केवल वह सबका मनोरंजन करते थे बल्कि कई गुत्थियां भी हंसते-हंसते सुलझा देते थे। बंगाल के राजा का उन्हें स्नेह प्राप्त था। राजा उन्हें हर तरह से प्रोत्साहन भी दिया करते थे।… अधिक पढ़ें संकट में मातृभाषा ही काम देती है। Sankat mein matrubhasha hi Kam deti hai.

वे रहेंगे तो आदर्श और संस्कार जीवित रहेंगे। Ve rahenge tu Adarsh aur Sanskar jeevit rahenge.

एक बार मगध के शासक ने कौशल राज्य पर हमला कर दिया। कौशल नरेश ने तुरंत अपनी प्रजा को नगर खाली कर किसी सुरक्षित प्रदेश में निकल जाने को कहा। राजाज्ञा मानकर सभी नागरिक अपने परिवार और सामान समेत नगर से प्रस्थान कर गए। मगघ की सेना ने नगर में प्रवेश किया और कौशल नरेश… अधिक पढ़ें वे रहेंगे तो आदर्श और संस्कार जीवित रहेंगे। Ve rahenge tu Adarsh aur Sanskar jeevit rahenge.

खुद की पहचान करो khud ki pahchan karo

तथागत यह भी कहते थे कि सबसे पहले व्यक्ति को खुद की पहचान करनी चाहिए । दूसरों की बजाय व्यक्ति खुद के बारे में ज्यादा जानता है। उनका मत था कि बुराई से घृणा करो , बुरे व्यक्ति से नहीं। एक बार की बात है , किसी गाँव के पास बहती नदी के किनारे बुद्ध… अधिक पढ़ें खुद की पहचान करो khud ki pahchan karo

बुराई को जड़ से ख़त्म करो burai ko jad se khatm karo

बुराई की ऊपरी कांट – छांट से वह नहीं मिटती ,उसे तो उसकी जड़ से मिटाना होता है। जब तक जड़ को नष्ट नहीं किया जाएगा तब तक कोई लाभ नहीं होगा। किसी नगर में एक आदमी रहता था। उसके आँगन में एक पौधा उग आया। कुछ दिनों बाद वह बड़ा हो गया और उस… अधिक पढ़ें बुराई को जड़ से ख़त्म करो burai ko jad se khatm karo

सुख और शांति की खोज ,उसी में है मौज। Sukh aur shanti ki khoj , usi mein hai mauj.

संत सिद्धेश्वर एक दिन एक टीले पर बैठे थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला , ‘ प्रणाम , मैं सेठ मणिमल हूं। मेरा एक मित्र है सुखीराम। उसका नाम तो सुखीराम है लेकिन उसके जीवन में सुख का अभाव है। मैं विश्व भ्रमण करके लौट रहा हूं। जब मैंने अपने मित्र से… अधिक पढ़ें सुख और शांति की खोज ,उसी में है मौज। Sukh aur shanti ki khoj , usi mein hai mauj.

हम अपने दुःखों एवं समस्याओं के लिए स्वयं ही जिम्मेदार हैं। Ham Apne dukkho avm samasyaon ke liye swayam hi jimmedar hai

एक दिन ऊंटों का एक कारवां एक धर्मशाला के पास आकर ठहरा। ऊंट वाला एक एक खूंटा गाड़ता जाता और उस के साथ हर ऊंट को बांधता जा रहा था। निन्यानवे खूंटे गाड़ चुका और उतने ही ऊंट बांध चुका था। पर उस के पास एक खूंटा कम पड़ गया। वह धर्मशाला के व्यवस्थापक के… अधिक पढ़ें हम अपने दुःखों एवं समस्याओं के लिए स्वयं ही जिम्मेदार हैं। Ham Apne dukkho avm samasyaon ke liye swayam hi jimmedar hai

खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

आंखें बंद करें और सोचे कि ” हमारे सुख के शत्रु कौन हैं ? “ तो हमारे आंखों के समक्ष दरिद्रता , शरीर की रोगिष्ट अवस्था , निष्फलता , उपेक्षा , अपमान इत्यादि तत्व आ जाएंगे , पर वास्तविकता यह है कि हमारे पास सद् विचारों की पूंजी न होने के कारण इन सब तत्वों… अधिक पढ़ें खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.

महाराज शीलभद्र वन – उपवनों में होते हुए तीर्थयात्रा के लिए जा रहे थे। रात्रि को उन्होंने एक आश्रम के निकट अपना पड़ाव डाला। आश्रम में आचार्य दम्पत्ति अपने कुछ शिष्यों के साथ निवास करते थे। शिष्यों का शिक्षण , ईश्वर आराधना , जीवन निर्वाह के लिए शरीर श्रम , इन्हीं में आश्रमवासियों का दिनभर… अधिक पढ़ें स्वस्थ रहने के लिए यही मूल मंत्र हैं। Swasth rahane ke liye yahi mul mantra hai.