ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai

किसी राज्य में एक प्रतापी राजा हुआ करता था। वो राजा रोज सुबह उठकर पूजा पाठ करता और गरीबों को दान देता। अपने इस उदार व्यवहार और दया की भावना की वजह से राजा पूरी जनता में बहुत लोकप्रिय हो गया था। रोज सुबह दरबार खुलते ही राजा के यहाँ गरीब और भिखारियों की लंबी… अधिक पढ़ें ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai

सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था , हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख , ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन , उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था‌। एक… अधिक पढ़ें सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

एक गांव के किनारे बनी कुटिया में एक साधु रहता था । वह दिन भर ईश्वर का भजन-कीर्तन करके समय बिताता था । उसे न तो अपने भोजन की चिंता रहती थी और न ही धन कमाने की । गांव के लोग स्वयं ही उसे भोजन दे जाते थे । साधू उसी भोजन से पेट… अधिक पढ़ें पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

त्याग में ही सुख है। Tyag mein hi sukh hai.

     कौशांबी में संत रामानंद नगर के बाहर एक कुटिया में अपने शिष्य गौतम के साथ रहते थे। नगरवासी उनका सम्मान करते हुए उन्हें पर्याप्त दान-दक्षिण दिया करते थे। एक दिन अचानक संत ने गौतम से कहा – यहां बहुत दिन रह लिया। चलो अब कहीं और रहा जाए। गौतम ने जवाब दिया – गुरुदेव… अधिक पढ़ें त्याग में ही सुख है। Tyag mein hi sukh hai.

खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

आंखें बंद करें और सोचे कि ” हमारे सुख के शत्रु कौन हैं ? “ तो हमारे आंखों के समक्ष दरिद्रता , शरीर की रोगिष्ट अवस्था , निष्फलता , उपेक्षा , अपमान इत्यादि तत्व आ जाएंगे , पर वास्तविकता यह है कि हमारे पास सद् विचारों की पूंजी न होने के कारण इन सब तत्वों… अधिक पढ़ें खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

कर्म से पहले अंजाम सोचे karm se pahle anjam soche

एक बार राजा नगरचर्या में निकले। रास्ते में देखा कि एक बैरागी चिल्ला रहा था , ‘ एक सुवचन एक लाख । ‘ राजा को जिज्ञासा हुई। राजा ने बैरागी से पूछा , तो जवाब मिला कि यदि आप धनराशि दे , तो ही आपको सुवचन प्राप्त होगा। राजा ने अपने वजीर से कहकर धनराशि… अधिक पढ़ें कर्म से पहले अंजाम सोचे karm se pahle anjam soche

पर – कष्ट निवारे वही शिक्षा है। Per – kasht niwari vahi shiksha hai.

परीक्षा लिए बिना जब गुरु ने अपने तीनों शिष्यों की शिक्षा पूरी होने की बात बताकर घर जाने को कहा तो उन्हें आश्‍चर्य तो हुआ किंतु गुरु को प्रणाम कर तीनों चलें। मार्ग में एक जगह कांटे बिखरे पड़े थे। इसे देखकर एक बार तो तीनों शिष्य रुक गये। पर कुछ देर बाद तीनों की… अधिक पढ़ें पर – कष्ट निवारे वही शिक्षा है। Per – kasht niwari vahi shiksha hai.

प्रजा का सच्चा प्रजापालक होना एक महान शासक की निशानी है। Praja ka saccha praja Palak Hona ek mahan shasak ki nishani hai.

एक बार महाराजा अशोक के राज्य में अकाल पड़ा। जनता भूख तथा प्यास से त्रस्त हो उठी। राजा ने तत्काल राज्य में अन्न के भंडार खुलवा दिए। सुबह से लेने वालों का ताँता लगता और शाम तक न टूटता। एक दिन संध्या हो गई। जब सब लेने वाले निपट गए तो एक कृशकाय बूढ़ा उठा… अधिक पढ़ें प्रजा का सच्चा प्रजापालक होना एक महान शासक की निशानी है। Praja ka saccha praja Palak Hona ek mahan shasak ki nishani hai.

लज्जा ही नारी का सच्चा आभूषण है। Lajja hi nari ka saccha abhushan hai.

मगध की सौंदर्य साम्राज्ञी वासवदत्ता उपवन विहार के लिए निकली। उसका साज शृंगार उस राजवधू की तरह था जो पहली बार ससुराल जाती है। एकाएक दृष्टि उपवन – ताल के किनारे स्फटिक शिला पर बैठे तरुण संन्यासी उपगुप्त पर गई। चीवरधारी ने बाह्य सौंदर्य को अंतर्निष्ठ कर लिया था और उस आनंद में कुछ ऐसा… अधिक पढ़ें लज्जा ही नारी का सच्चा आभूषण है। Lajja hi nari ka saccha abhushan hai.

मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun

एक बौद्ध धर्मगुरु थे। उनके दर्शनों के लिए लोग अक्सर आश्रम में आते थे। स्वामीजी बड़ी उदारता से सबसे मिलते – बात करते और उनकी समस्याओं का समाधान करते। रोज स्वामीजी के पास दर्शनार्थी की भीड़ लगी रहती थी। स्वामीजी की प्रशंसा सुनकर एक साधारण ग्रामीण बहुत प्रभावित हुआ। वह भी स्वामीजी के दर्शानार्थ आश्रम… अधिक पढ़ें मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun