देने का आनंद असीम है Dene Ka Anand Aseem hai

एक बार एक शिक्षक संपन्न परिवार से सम्बन्ध रखने वाले एक युवा शिष्य के साथ कहीं टहलने निकले। उन्होंने देखा की रास्ते में पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं , जो संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे जो अब अपना काम ख़त्म कर घर वापस जाने… अधिक पढ़ें देने का आनंद असीम है Dene Ka Anand Aseem hai

एक त्याग रहा था , दूसरा ले रहा था Ek tyag raha tha , dusra le raha tha

बहुत पुरानी कहानी है। एक ब्राह्मण पंडित जगह-जगह जाकर गीता का पाठ सुनाया करते थे। एक बार वे अपने गांव से दूर दूसरे गांव के सेठ के निमंत्रण पर उन्हें गीता – पाठ सुनाने के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक नदी आई वहां एक मगरमच्छ रहता था। उसने ब्राह्मण से गीता – पाठ… अधिक पढ़ें एक त्याग रहा था , दूसरा ले रहा था Ek tyag raha tha , dusra le raha tha

वैराग्य से सब सुख आसानी से मिल जाता है Vairagya se sab aasani se mil jata hai

वैराग्य का आना स्वाभाविक है। उम्र बढ़ने के साथ , तुम्हारा मन स्वतः ही छोटी-छोटी बातों में नहीं अटकता है। जैसे बचपन में तुम्हें लौलीपॉप से लगाव था , पर वह लगाव स्कूल या कॉलेज आने पर स्वतः ही छूट गया। बड़े होने पर भी दोस्त तो रहते हैं पर उनके साथ उतना मोह नहीं… अधिक पढ़ें वैराग्य से सब सुख आसानी से मिल जाता है Vairagya se sab aasani se mil jata hai

ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai

किसी राज्य में एक प्रतापी राजा हुआ करता था। वो राजा रोज सुबह उठकर पूजा पाठ करता और गरीबों को दान देता। अपने इस उदार व्यवहार और दया की भावना की वजह से राजा पूरी जनता में बहुत लोकप्रिय हो गया था। रोज सुबह दरबार खुलते ही राजा के यहाँ गरीब और भिखारियों की लंबी… अधिक पढ़ें ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai

सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था , हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख , ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन , उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था‌। एक… अधिक पढ़ें सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

एक गांव के किनारे बनी कुटिया में एक साधु रहता था । वह दिन भर ईश्वर का भजन-कीर्तन करके समय बिताता था । उसे न तो अपने भोजन की चिंता रहती थी और न ही धन कमाने की । गांव के लोग स्वयं ही उसे भोजन दे जाते थे । साधू उसी भोजन से पेट… अधिक पढ़ें पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

त्याग में ही सुख है। Tyag mein hi sukh hai.

     कौशांबी में संत रामानंद नगर के बाहर एक कुटिया में अपने शिष्य गौतम के साथ रहते थे। नगरवासी उनका सम्मान करते हुए उन्हें पर्याप्त दान-दक्षिण दिया करते थे। एक दिन अचानक संत ने गौतम से कहा – यहां बहुत दिन रह लिया। चलो अब कहीं और रहा जाए। गौतम ने जवाब दिया – गुरुदेव… अधिक पढ़ें त्याग में ही सुख है। Tyag mein hi sukh hai.

खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

आंखें बंद करें और सोचे कि ” हमारे सुख के शत्रु कौन हैं ? “ तो हमारे आंखों के समक्ष दरिद्रता , शरीर की रोगिष्ट अवस्था , निष्फलता , उपेक्षा , अपमान इत्यादि तत्व आ जाएंगे , पर वास्तविकता यह है कि हमारे पास सद् विचारों की पूंजी न होने के कारण इन सब तत्वों… अधिक पढ़ें खराब विचार हमारे शत्रु है kharab vichar hamare shatru Hain

कर्म से पहले अंजाम सोचे karm se pahle anjam soche

एक बार राजा नगरचर्या में निकले। रास्ते में देखा कि एक बैरागी चिल्ला रहा था , ‘ एक सुवचन एक लाख । ‘ राजा को जिज्ञासा हुई। राजा ने बैरागी से पूछा , तो जवाब मिला कि यदि आप धनराशि दे , तो ही आपको सुवचन प्राप्त होगा। राजा ने अपने वजीर से कहकर धनराशि… अधिक पढ़ें कर्म से पहले अंजाम सोचे karm se pahle anjam soche

पर – कष्ट निवारे वही शिक्षा है। Per – kasht niwari vahi shiksha hai.

परीक्षा लिए बिना जब गुरु ने अपने तीनों शिष्यों की शिक्षा पूरी होने की बात बताकर घर जाने को कहा तो उन्हें आश्‍चर्य तो हुआ किंतु गुरु को प्रणाम कर तीनों चलें। मार्ग में एक जगह कांटे बिखरे पड़े थे। इसे देखकर एक बार तो तीनों शिष्य रुक गये। पर कुछ देर बाद तीनों की… अधिक पढ़ें पर – कष्ट निवारे वही शिक्षा है। Per – kasht niwari vahi shiksha hai.