मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

एक सेठ थे। उनकी कोठी के बाहर सड़क के किनारे एक मोची बैठता था जो जूते मरम्मत करने के दौरान बीच – बीच में भजन या कोई गीत गुनगुनाता रहता था , लेकिन सेठ जी का ध्यान कभी मोची के गानों पर नहीं गया। एक बार सेठ जी बीमार पड़ गए। बिस्तर पकड़ लिया ।… अधिक पढ़ें मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

राजा होने के कारण देवराज इंद्र को अपने आप पर बहुत घमंड आ चूका था तथा अन्य देवताओ को वे अपने समक्ष तुच्छ समझते थे। अपनी राजगद्दी को भी लेकर वे इतने आशंकित रहते थे की यदि कोई ऋषि मुनि तपश्या में बैठे तो वे आतंकित हो जाते थे , कहीं वो वरदान में त्रिदेवो से इन्द्रलोक का सिहासन ना मांग ले। ऐसे ही… अधिक पढ़ें शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

विचारों के सहारे मन का मेला होना vicharon ke sahare Man Ka Mela hona

एक वृद्ध भिक्षु और एक युवा भिक्षु दोनों नदी किनारे से चले जा रहे थे , तभी उन्होंने देखा कि एक युवती नदी में डूब रही है और बचाओ बचाओ के लिए आवाज दे रही है। युवा भिक्षु तुरंत नदी में कुदा और युवती को नदी से बाहर निकाल लाया। इस तरह से उसने उस… अधिक पढ़ें विचारों के सहारे मन का मेला होना vicharon ke sahare Man Ka Mela hona

अन्न का अपमान Anna ka apman

एक युवा भारतीय अमीर अपने मित्रों सहित मौज-मस्ती के लिए जर्मनी गया। उनकी नजर में जर्मनी एक विकसित देश था, इसलिए वहां के लोग विलासिता का जीवन जीते थे। डिनर के लिए वे एक रेस्त्रां में पहुंचे। वहां एक मेज पर एक युवा जोड़े को मात्र दो पेय पदार्थ और दो व्यंजन के साथ भोजन… अधिक पढ़ें अन्न का अपमान Anna ka apman

सोने जैसा जीवन sone jaisa Jeevan

अर्जनगढ़ के राजा अर्जन सिंह कपिल मुनि के आश्रम में नियमित रूप से आते – जाते रहते थे। कपिल मुनि अत्यंत ज्ञानवान , विवेकशील और गुणवान थे। वह अपने पास आने वाले सभी व्यक्तियों की समस्याओं को सुलझाया करते थे। एक दिन राजा ने गौर किया कि एक निपट देहाती और अनपढ़ व्यक्ति कपिल मुनि… अधिक पढ़ें सोने जैसा जीवन sone jaisa Jeevan

शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

कलाप्रस्तर नामक एक मूर्तिकार बेहद सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। उसने अपने बेटे अहं को भी मूर्तिकला का ज्ञान देना शुरू किया। कुछ वर्षों में बेटा भी मूर्तियां बनाने में निपुण हो गया। अब पिता – पुत्र दोनों बाजार जाते और मूर्तियां बेचकर आ जाते। कुछ समय बाद प्रस्तर ने अहं की मूर्तियों को अलग… अधिक पढ़ें शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

देनेवाला जब भी देता , देता छप्पर फाड़ के dene wala jab Bhi deta , deta chappar phadke

 एक गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था , वह बहुत ही ईमानदार और भोला-भाला था , वह सदा ही दूसरों की सहायता करने के लिए तैयार रहता था। एक बार की बात है कि शाम के समय वह दिशा मैदान (शौच) के लिए खेत की ओर गया , दिशा मैदान करने के… अधिक पढ़ें देनेवाला जब भी देता , देता छप्पर फाड़ के dene wala jab Bhi deta , deta chappar phadke

कछुआ मुझे सदैव ही प्रेरणा देता हैं kachhua mujhe sadaiv hi prerna deta hai

एक साधु गंगा किनारे झोपड़ी बनाकर रहते थे। सोने के लिए बिस्तर , पानी पीने के लिए मिट्टी का घड़ा और दो कपड़े- बस , यही उनकी जमा-पूंजी थी। उन्होंने एक कछुआ पाल रखा था। सुबह स्नान कर वे पास की बस्ती में जाते और वहां कोई न कोई गृहस्थ उन्हें रोटी दे देता। कछुए… अधिक पढ़ें कछुआ मुझे सदैव ही प्रेरणा देता हैं kachhua mujhe sadaiv hi prerna deta hai

इंसानियत का होना धर्म के आडंबर से महान है insaniyat Ka Hona dharm ke adambar se mahan hai

एक विशाल मंदिर था। उसके प्रधान पुजारी की मृत्यु के बाद मंदिर के प्रबंधक ने नए पुजारी की नियुक्ति के लिए घोषणा कराई और शर्त रखी कि जो कल सुबह मंदिर में आकर पूजा विषयक ज्ञान में अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करेगा , उसे पुजारी रखा जाएगा। यह घोषणा सुनकर अनेक पुजारी सुबह मंदिर के… अधिक पढ़ें इंसानियत का होना धर्म के आडंबर से महान है insaniyat Ka Hona dharm ke adambar se mahan hai

परिश्रम और आस्था से संतुष्टि का व्यवसाय parishram aur aastha se santushti ka vyavsay

भक्त रैदास फटे जूते की सिलाई में ऐसे तल्लीन थे कि सामने कौन खड़ा है , इसका उन्हें भान भी न हुआ। आगंतुक भी कब तक प्रतीक्षा करता , उसने खांसकर रैदास का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रैदास ने दृष्टि ऊपर उठाई सामने एक सज्जन थे। उन्हें देख वे हडबडा कर खड़े हो गए… अधिक पढ़ें परिश्रम और आस्था से संतुष्टि का व्यवसाय parishram aur aastha se santushti ka vyavsay