धर्मसाधना के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सानुकूल परिवार का होना बहुत जरूरी है Dharm Sadhna ke Marg mein aage badhane ke liye Sonukul Parivar Ka hona bahut jaruri hai

विमल मंत्री नि:संतान थे। एक और उन्हें संतान की कामना थी तो दूसरी और उनके दिल में आबू के पर्वतों पर देवाधिदेव वीतराग परमात्मा का भव्यातिभव्य जिन मंदिर के निर्माण की अदम्य लालसा थी। अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए अंबिका देवी की आराधना की। देवी ने कहा , ‘ विमल ! तेरा भाग्य अपूर्ण… अधिक पढ़ें धर्मसाधना के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सानुकूल परिवार का होना बहुत जरूरी है Dharm Sadhna ke Marg mein aage badhane ke liye Sonukul Parivar Ka hona bahut jaruri hai

भक्त ध्रुव से ध्रुवतारा बनने की कथा Bhakt dhruv se dhruvTara banne ki katha

जो भक्ति करता है वह उत्तम पदवी, मोक्ष तथा प्रसिद्धि को प्राप्त करता हैं। यह सब भगवान की लीला है। सत् युग में एक ऐसे ही भक्त हुए हैं जिनका नाम ध्रुव था।  भक्त ध्रुव जी का जन्म राजा उतानपाद के महल में हुआ। राजा की दो रानियाँ थी। भक्त ध्रुव की माता का नाम… अधिक पढ़ें भक्त ध्रुव से ध्रुवतारा बनने की कथा Bhakt dhruv se dhruvTara banne ki katha

मैं चंद्रशेखर आजाद हूं main chandrashekhar Azad hun

बुंदेलखण्ड में ओरछा के निकट एक नदी बहती है , जिसे सातार नदी कहते हैं। उस नदी के किनारे पर एक छोटी-सी कुटिया थी , जिसमें एक आदमी रहता था। घर-बार तो उसका कुछ था नहीं। बदन पर भी वह बस एक लंगोटी बांधे रखता था। लोग उसे ‘ब्रह्मचारी’ कहकर पुकारते थे। आस-पास के गांवों… अधिक पढ़ें मैं चंद्रशेखर आजाद हूं main chandrashekhar Azad hun

भगवान की भक्ति ही शरीर का सदुपयोग है bhagwan ki bhakti hi sharir ka sadupyog hai

हर जीव परमात्मा का ही अंश है जो परमात्मा से बिछड़ गया है। इसलिए हर जीव परमात्मा को प्राप्त करने के लिए छटपटा रहा है। परामात्मा से मिलने का आनंद जीव सांसारिक पदार्थों में ढूंढ़ा करता है। किन्तु क्षणभंगुर संसार में वह शाश्वत परम आनंद मिल ही नहीं पाता , क्षणभंगुर विषयों के आनंद में… अधिक पढ़ें भगवान की भक्ति ही शरीर का सदुपयोग है bhagwan ki bhakti hi sharir ka sadupyog hai

पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai

हिन्दू सनातन धर्म में प्रायः त्रिदेवो ब्रह्मा , विष्णु तथा महेश को अन्य देवो में प्रधानता दी गयी है जिनमे ब्रह्माजी सृष्टि के रचियता है , भगवान विष्णु पालनहार व भगवान शिव संहारकर्ता है।  भारत में आपको भगवान विष्णु और शिव के असंख्य मंदिर बड़े आसनी से मिल जायेंगे परन्तु ब्रह्मा जी का मंदिर आपको भारत ही नही बल्कि पूरी दुनिया में सिर्फ… अधिक पढ़ें पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai

अपने हर काम में कुछ इस तरह ढूंढें आनंद Apne har kaam mein Kuch is Tarah dhundhe Anand

एक गांव में कुछ मजदूर पत्थर के खंभे बना रहे थे। उधर से एक संत गुजरे। उन्होंने एक मजदूर से पूछा – यहां क्या बन रहा है ? उसने कहा – देखते नहीं पत्थर काट रहा हूं ? संत ने कहा – हां , देख तो रहा हूं। लेकिन यहां बनेगा क्या ? मजदूर झुंझला… अधिक पढ़ें अपने हर काम में कुछ इस तरह ढूंढें आनंद Apne har kaam mein Kuch is Tarah dhundhe Anand

मृत्यु का बोध mrutyu ka bodh

एक युवक सद्गुरु बायजीद के पास वर्षों से जाया करता था। वह आश्चर्यचकित था , उनके पवित्र आचरण को देखकर । एक दिन उसने पूछ लिया , ‘ भंते ! मैं वर्षों से आपको देख रहा हूं । अब तक मुझे आपमें एक भी दोष दिखाई नहीं दिया । मन में इस बात का विश्वास… अधिक पढ़ें मृत्यु का बोध mrutyu ka bodh

जो होता है अच्छे के लिए होता है, शुक्रिया करो रब का Jo hota hai acche ke liye hota hai, shukriya karo Rab Ka

अपने बचपन में एक कहानी सुनी होगी कि एक राजा का अंगूठा कट गया। उसने यह बात मंत्री को बताई। मंत्री ने कहा, ‘उदास ना हो राजन जो होता है अच्छे के लिए होता है।’ राजा यह बात सुनकर क्रोधित हो गया कि उसका तो अंगूठा कट गया और मंत्री कह रहा है जो होता… अधिक पढ़ें जो होता है अच्छे के लिए होता है, शुक्रिया करो रब का Jo hota hai acche ke liye hota hai, shukriya karo Rab Ka

मृत्यु से छुटकारा तभी मिलेगा जब तुम मोह करना छोड़ दोगे Mrityu se chutkara tabhi milega jab tum moh karna chod doge

किसी नगर में एक आदमी रहता था। वह पढ़ा – लिखा और चतुर भी था। उसके भीतर धन कमाने की लालसा थी। जब पुरुषार्थ को भाग्य का सहयोग मिला तो उसके पास लाखों की संपदा हो गई। ज्यों – ज्यों पैसा आता गया उसका लोभ बढ़ता गया। वह बड़ा खुश था कि कहां तो उसके… अधिक पढ़ें मृत्यु से छुटकारा तभी मिलेगा जब तुम मोह करना छोड़ दोगे Mrityu se chutkara tabhi milega jab tum moh karna chod doge

चिंता ‘चिता’ समान और चिंतन ‘अमृत’ की तरह chinta ‘Chita’ saman hai aur Chintan ‘Amrit’ ki tarah

आयुर्वेद में दो प्रकार के रोग बताए गए हैं। पहला, शारीरिक रोग और दूसरा, मानसिक रोग। जब शरीर का रोग होता है, तो मन पर और मन के रोग का शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शरीर और मन का गहरा संबंध है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अंधकार, ईर्ष्‍या, द्वेष आदि मनोविकार हैं। ये मन… अधिक पढ़ें चिंता ‘चिता’ समान और चिंतन ‘अमृत’ की तरह chinta ‘Chita’ saman hai aur Chintan ‘Amrit’ ki tarah