सत्य की वीणा Satya ki veena

एक संन्यासी ईश्वर की खोज में निकला हुआ था और एक आश्रम में जाकर ठहरा। पंद्रह दिन तक उस आश्रम में रहा , फिर ऊब गया। उस आश्रम का जो बूढ़ा गुरु था वह कुछ थोड़ी सी बातें जानता था , रोज उन्हीं को दोहरा देता था। फिर उस युवा संन्यासी ने सोचा , यह… अधिक पढ़ें सत्य की वीणा Satya ki veena

शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों , उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग , वेद और नीति में निष्णात थे , तंत्रकर्म तथा ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी पारंगत थे , यानी जीवन और अध्यात्म की हर विधा… अधिक पढ़ें शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि ‘ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा , साथ ही दूरस्थ… अधिक पढ़ें महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

सभी का भला सोचने वाला सदा ही सुख पाता है। Sabhi ka bhala sochne wala sada hi sukh pata hai.

रामानुजाचार्य प्राचीन काल में हुए एक प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका जन्म मद्रास नगर के समीप पेरुबुदूर गाँव में हुआ था। बाल्यकाल में इन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया। रामानुज के गुरु ने बहुत मनोयोग से शिष्य को शिक्षा दी। शिक्षा समाप्त होने पर वे बोले – ‘ पुत्र , मैं तुम्हें एक मंत्र… अधिक पढ़ें सभी का भला सोचने वाला सदा ही सुख पाता है। Sabhi ka bhala sochne wala sada hi sukh pata hai.

मृत्यु का दर्शन mrutyu ka darshan

एक प्राचीन रूसी कथा है। एक बड़े टोकरे में बहुत से मुर्गे आपस में लड़ रहे थे। नीचे वाला खुली हवा में सांस लेने के लिए अपने ऊपर वाले को गिराकर ऊपर आने के लिए फड़फड़ाता है। सब भूख – प्यास से व्याकुल हैं। इतने में कसाई छुरी लेकर आ जाता है , एक –… अधिक पढ़ें मृत्यु का दर्शन mrutyu ka darshan

अपने कर्म को शुद्ध कैसे करे Apne karma ko shuddh Karen

हमें अपना पुण्य छुपा कर रखना चाहिए तथा यदि हमारा पाप प्रगट हो जाय तो चिन्ता नहीं करनी चाहिए। यदि पाप प्रगट हो तो उसका विनाश हो जाता है। परन्तु सभी लोग अपने पापों को तो छिपा कर रखते है तथा पुण्य को प्रगट कर देते है। जिससे पुण्य धीरे-धीरे क्षीण होता जाता है। तथा… अधिक पढ़ें अपने कर्म को शुद्ध कैसे करे Apne karma ko shuddh Karen

कर्म Karma

सफलता के साथ शांति चाहिए तो अपने लिए भी जीएं । आज आप कितना भी काम कर लीजिए , लेकिन शाम को घर लौटते समय एक बेचैनी साथ लेकर ही जाएंगे। काम बहुत कर रहे हैं लेकिन संतुष्टि नहीं है। लोग सफलता की अंधी दौड़ में दौड़ तो रहे हैं , मनचाहा पैसा भी कमा… अधिक पढ़ें कर्म Karma

कभी-कभी मूर्ख बनना भी फायदेमंद होता है Kabhi Kabhi murkh banna bhi faydemand hota hai

मुल्ला नसीरुद्दीन की बुद्धि और प्रतिभा की लोग बहुत तारीफ़ करते थे। कुछ लोग उनको मुर्ख गधा भी कहते थे। उनके बुद्धिचातुर्य के बारे में एक एक कथा बहुत प्रचलित है जो दोस्तों हम आपको आज सुनाते है। एक समय में मुल्ला नसीरुद्दीन इतने गरीब हो गये कि उनको घर घर भटक के भीख माँगना… अधिक पढ़ें कभी-कभी मूर्ख बनना भी फायदेमंद होता है Kabhi Kabhi murkh banna bhi faydemand hota hai

उपाली और महात्मा बुद्ध upali aur mahatma buddh

उपाली बहुत ही धनी व्यक्ति था और गौतम बुद्ध के ही समकालीन एक अन्य धार्मिक गुरु निगंथा नाथपुत्ता का शिष्य था। नाथपुत्ता के उपदेश बुद्ध से अलग प्रकार के थे। उपाली एक बहुत ही विलक्षण वक्ता था और वाद-विवाद में भी बहुत ही कुशल था। उसके गुरु ने उसे एक दिन कहा कि वह कर्म… अधिक पढ़ें उपाली और महात्मा बुद्ध upali aur mahatma buddh

अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

श्रमण हरिकेशबल चांडाल कुल में उत्पन्न हुए थे। बचपन में जातिवाद के शिकार हुए। उन्हें संसार से घृणा हुई और वे श्रमण बन गए। एक दिन हरिकेशबल ध्यान में लीन थे। राजकुमारी भद्रा मंदिर में पूजन कर बाहर निकली थी। अचानक भद्रा की नजर हरिकेशबल पर पड़ी। हरिकेशबल का काला – कलूटा शरीर देखकर राजकुमारी… अधिक पढ़ें अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya