कर्म Karma

सफलता के साथ शांति चाहिए तो अपने लिए भी जीएं । आज आप कितना भी काम कर लीजिए , लेकिन शाम को घर लौटते समय एक बेचैनी साथ लेकर ही जाएंगे। काम बहुत कर रहे हैं लेकिन संतुष्टि नहीं है। लोग सफलता की अंधी दौड़ में दौड़ तो रहे हैं , मनचाहा पैसा भी कमा… अधिक पढ़ें कर्म Karma

कभी-कभी मूर्ख बनना भी फायदेमंद होता है Kabhi Kabhi murkh banna bhi faydemand hota hai

मुल्ला नसीरुद्दीन की बुद्धि और प्रतिभा की लोग बहुत तारीफ़ करते थे। कुछ लोग उनको मुर्ख गधा भी कहते थे। उनके बुद्धिचातुर्य के बारे में एक एक कथा बहुत प्रचलित है जो दोस्तों हम आपको आज सुनाते है। एक समय में मुल्ला नसीरुद्दीन इतने गरीब हो गये कि उनको घर घर भटक के भीख माँगना… अधिक पढ़ें कभी-कभी मूर्ख बनना भी फायदेमंद होता है Kabhi Kabhi murkh banna bhi faydemand hota hai

उपाली और महात्मा बुद्ध upali aur mahatma buddh

उपाली बहुत ही धनी व्यक्ति था और गौतम बुद्ध के ही समकालीन एक अन्य धार्मिक गुरु निगंथा नाथपुत्ता का शिष्य था। नाथपुत्ता के उपदेश बुद्ध से अलग प्रकार के थे। उपाली एक बहुत ही विलक्षण वक्ता था और वाद-विवाद में भी बहुत ही कुशल था। उसके गुरु ने उसे एक दिन कहा कि वह कर्म… अधिक पढ़ें उपाली और महात्मा बुद्ध upali aur mahatma buddh

अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

श्रमण हरिकेशबल चांडाल कुल में उत्पन्न हुए थे। बचपन में जातिवाद के शिकार हुए। उन्हें संसार से घृणा हुई और वे श्रमण बन गए। एक दिन हरिकेशबल ध्यान में लीन थे। राजकुमारी भद्रा मंदिर में पूजन कर बाहर निकली थी। अचानक भद्रा की नजर हरिकेशबल पर पड़ी। हरिकेशबल का काला – कलूटा शरीर देखकर राजकुमारी… अधिक पढ़ें अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

शब्दों का भी अपना सामर्थ्य होता है shabdon ka bhi apna Samarth hota hai

एक दिन रात्रि में रामकृष्ण प्रवचन दे रहे थे। काफी लोग इकट्ठे थे सभा में। उन्होंने ओम् पर चर्चा शुरू कर दी। वे ध्वनि – विज्ञान पर प्रकाश डालने लगे । प्रवचन के बीच एक पंडित बोला , ‘ ठहरें , आप इतनी देर से ओंकार शब्द की महिमा गाए जा रहे हैं। शब्दों में… अधिक पढ़ें शब्दों का भी अपना सामर्थ्य होता है shabdon ka bhi apna Samarth hota hai

सीमा पंथ की , संप्रदाय की और जाति की , Seema pant ki , samprday ki aur jaati ki ,

राजा ने संतो और महंतों के लिए एक दिन विशेष भोज का आयोजन किया। भोजन उपरांत राजा ने घोषणा की , ‘ मैं अपने नगर के बाहर प्रबुद्ध पुरुषों का एक उपनिवेश बसाना चाहता हूं । राजधानी के बाहर , झील के पीछे जंगल में जो जितनी भूमि घेरना चाहे , घेर ले और अपनी… अधिक पढ़ें सीमा पंथ की , संप्रदाय की और जाति की , Seema pant ki , samprday ki aur jaati ki ,

सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

दार्शनिक मौलुंकपुत्र तथागत बुद्ध के पास गया और पूछा , ‘ क्या ईश्वर है ? बुद्ध ने कहा , ‘ तुम्हारे प्रश्न का उत्तर अवश्य दूंगा , पर पहले यह बताओ कि यह तुम्हारी बौध्दिक उपज है या सत्य जानने का प्रयास। ‘ मौलुंकपुत्र ने कहा , ‘ बौद्धिक खुजलाहट बहुत कर चुका हूं। अब… अधिक पढ़ें सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

अपने अंदर के वीतराग को जगाए Apne andar ke vitraag ko jagay

संत रांका अपरिग्रही और अकिंचन माने जाते थे। परिवार के नाम पर केवल एक पत्नी थी। पति – पत्नी दोनों जंगल में जाते , लकड़ियां काटते और उन्हें बैचकर अपनी आजीविका चलाते थे। वर्षा – ऋतु थी । पांच – छह दिन तक निरंतर पानी बरसा। वे दोनों लकड़ियां काटने न जा सके। छह दिन… अधिक पढ़ें अपने अंदर के वीतराग को जगाए Apne andar ke vitraag ko jagay

गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

इंद्रभूति गौतम तीर्थंकर महावीर के परम शिष्य थे। महावीर प्राय: उन्हें कहा करते थे , ‘ शिष्य , होश संभालो। ‘ गौतम के लिए महावीर सर्वोपरि थे। एक क्षण के लिए भी महावीर का त्याग उनके लिए असहनीय था। परमात्मा से प्रेम किया जाता है , पर गौतम ने तो राग – श्रृंखलाएं निर्मित कर… अधिक पढ़ें गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

ज़िंदगी का कड़वा सच jindagi ka kadva sach

एक भिखारी था । वह न ठीक से खाता था , न पीता था , जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था । उसकी एक – एक हड्डी गिनी जा सकती थी । उसकी आंखों की ज्योति चली गई थी । उसे कोढ़ हो गया था । बेचारा रास्ते के एक… अधिक पढ़ें ज़िंदगी का कड़वा सच jindagi ka kadva sach