शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

कलाप्रस्तर नामक एक मूर्तिकार बेहद सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। उसने अपने बेटे अहं को भी मूर्तिकला का ज्ञान देना शुरू किया। कुछ वर्षों में बेटा भी मूर्तियां बनाने में निपुण हो गया। अब पिता – पुत्र दोनों बाजार जाते और मूर्तियां बेचकर आ जाते। कुछ समय बाद प्रस्तर ने अहं की मूर्तियों को अलग… अधिक पढ़ें शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी उसकी पुकार bhagwan Shri Krishna ne suni uski pukar

कौरवों और पाण्डवों की सेनाएँ आमने – सामने आ गईं। शंख बजने लगे , घोड़े खुरों से जमीन खूँदने और हाथी चिंघाड़ने लगे। कुरुक्षेत्र के समरांगण में सर्वनाश की तैयारी पूरी हो चुकी थी। ठीक तभी एक टिटहरी का आर्तनाद गूँज उठा।दोनों शिविरों के मध्य एक छोटी सी टेकरी थी , उसी की खोह में… अधिक पढ़ें भगवान श्रीकृष्ण ने सुनी उसकी पुकार bhagwan Shri Krishna ne suni uski pukar

पढ़ने योग्य लिखा जाए इसकी अपेक्षा अच्छा लिखने योग्य किया जाए। Padhne yogya likha jaaye iski apeksha likhane yogya kiya jaaye.

यदि मेरे पास दो विकल्प हों –एक यह कि ,‘ मैं ऐसा सटीक लिखूं कि मेरा लिखा हुआ पढ़ने के लिए लोग मजबूर हो जाए ‘और दूसरा यह कि ,‘ मैं ऐसा जीवन जी लूं कि मेरे जीवन पर लिखने के लिए लोग मजबूर हो जाए ‘तो मैं किस विकल्प को पसंद करूंगा ? प्रथम… अधिक पढ़ें पढ़ने योग्य लिखा जाए इसकी अपेक्षा अच्छा लिखने योग्य किया जाए। Padhne yogya likha jaaye iski apeksha likhane yogya kiya jaaye.

पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

   राजा शर्याति अपने परिवार समेत एक बार वन विहार के लिए गए। एक सुरम्य सरोवर के निकट पड़ाव पड़ा। बच्चे इधर – उधर खेल , विनोद करते हुए घूमने लगे। मिट्टी के ढेर के नीचे से दो तेजस्वी मणियाँ जैसी चमकती देखीं तो राजकन्या को कुतूहल हुआ। उसने लकड़ी के सहारे उन चमकती वस्तुओं… अधिक पढ़ें पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

समय को सोच समझकर खर्च करें samay ko Soch samajh Kar kharch Karen

भगवान बुद्ध समय की महत्ता को बहुत अच्छी तरह से जानते थे। वे अपना एक भी क्षण कभी व्यर्थ नहीं गंवाते थे। एक बार उनके पास एक व्यक्ति आया और बोला , ‘ महाराज , आप हर बार विमुक्ति की बात करते हैं। आखिर यह दुःख होता किसे है और दुःख को कैसे दूर किया… अधिक पढ़ें समय को सोच समझकर खर्च करें samay ko Soch samajh Kar kharch Karen

एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.

एक बार महात्मा बुद्ध किसी गांव में गए। वहां एक स्त्री ने उनसे पूछा कि आप तो किसी राजकुमार की तरह दिखते हैं , आपने युवावस्था में गेरुआ वस्त्र क्यों धारण किया है ? बुद्ध ने उत्तर दिया कि मैंने तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए संन्यास लिया है। बुद्ध ने कहा – हमारा… अधिक पढ़ें एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.

कर्म का महत्त्व ही जीवन का सार है। Karam ka mahatva hi jivan ka sar hai.

एक बेरोजगार आदमी की पत्नी ने उसे घर से निकालते हुए कहा आज कुछ न कुछ कमाकर ही लौटना नहीं तो घर में नहीं घुसने दूंगी। आदमी दिन भर इधर – उधर भटकता रहा , लेकिन उसे कुछ काम नहीं मिला। निराश मन से वह जा रहा था कि उसकी नजर एक मरे हुए सांप… अधिक पढ़ें कर्म का महत्त्व ही जीवन का सार है। Karam ka mahatva hi jivan ka sar hai.

संसार एक मायाजाल है sansar ek Maya jaal hai

एक सूफी फकीर मस्जिद में बैठकर अल्लाह से अपनी लौ में लीन थे।  चारों तरफ प्रकाश फैला था। तभी अचानक झरोखे से एक पक्षी अन्दर आ गया। वह कुछ देर तक तो अन्दर इधर – उधर होता रहा। फिर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। कभी वह इस कोने से निकलने की कोशिश करता तो… अधिक पढ़ें संसार एक मायाजाल है sansar ek Maya jaal hai

आजादी ही आत्म संतुष्टि हैं azadi hi atma santushti hai

एक कौआ था जो अपनी जिंदगी से बहुत खुश और संतुष्ट था। एक बार वह एक तालाब पर पानी पीने रुका। वहां पर उसने सफ़ेद रंग के पक्षी हंस को देखा। उसने सोचा मैं बहुत काला हूँ और हंस इतना सुन्दर इसलिए शायद हंस इस दुनिया का सबसे खुश पक्षी होगा। कौआ हंस के पास… अधिक पढ़ें आजादी ही आत्म संतुष्टि हैं azadi hi atma santushti hai

यंत्र मंत्र तंत्र छोड़ो और स्वतंत्रता स्थापित करो। Yantra Mantra tantra chhodo aur swatantrata sthapit karo.

शिव जी का तंत्र बहुत समय पहले की बात है। एक बड़ा सा तालाब था उसमें सैकड़ों मेंढक रहते थे। तालाब में कोई राजा नहीं था , सच मानो तो सभी राजा थे। दिन पर दिन अनुशासन हीनता बढ़ती जाती थी और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था। उसे ठीक करने का… अधिक पढ़ें यंत्र मंत्र तंत्र छोड़ो और स्वतंत्रता स्थापित करो। Yantra Mantra tantra chhodo aur swatantrata sthapit karo.