ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे। यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र मानती थीं , तथापि रानी सुरुचि… अधिक पढ़ें ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

बुद्ध के पास एक राजकुमार दीक्षित हो गया , दीक्षा के दूसरे ही दिन किसी श्राविका के घर उसे भिक्षा लेने बुद्ध ने भेज दिया। वह वहां गया। रास्ते में दो – तीन घटनाएं एसी घटीं , लौटते में उनसे वह बहुत परेशान हो गया। रास्ते में उसके मन में खयाल आया कि मुझे जो… अधिक पढ़ें आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

इर्ष्या , क्रोध और अपमान Elrshiya krodh aur apman

टोकियो के निकट एक महान ज़ेन मास्टर रहते थे , वो अब वृद्ध हो चुके थे और अपने आश्रम में ज़ेन बुद्धिज़्म की शिक्षा देते थे । एक नौजवान योद्धा , जिसने कभी कोई युद्ध नहीं हारा था। उसने सोचा की अगर मैं मास्टर को लड़ने के लिए उकसा कर उन्हें लड़ाई में हरा दूँ… अधिक पढ़ें इर्ष्या , क्रोध और अपमान Elrshiya krodh aur apman

संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। Samvedansheelta ka yah shreshth drishtant hai

एक पोस्टमैन ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा , ” चिट्ठी ले लीजिये ”अंदर से एक बालिका की आवाज आई , ” आ रही हूँ। ” लेकिन तीन-चार मिनट तक कोई न आया तो पोस्टमैन ने फिर कहा , ” अरे भाई ! मकान में कोई है क्या , अपनी चिट्ठी… अधिक पढ़ें संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। Samvedansheelta ka yah shreshth drishtant hai

शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों , उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग , वेद और नीति में निष्णात थे , तंत्रकर्म तथा ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी पारंगत थे , यानी जीवन और अध्यात्म की हर विधा… अधिक पढ़ें शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि ‘ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा , साथ ही दूरस्थ… अधिक पढ़ें महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

पैसे से हर प्रकार की खुशी नही प्राप्त की जा सकती Paise se Har prakar ki Khushi Nahi prapt ki ja sakti

एक गरीब मोची और एक धनी व्यापारी , दोनो पड़ोसी थे। मोची के घर में ही जूते चप्पल सीने की छोटी सी दुकान थी। काम करते-करते वह अक्सर मौज में आकर गाने लगता। वह बहुत निशचिंत मस्तमौला आदमी था। उसे कभी अपने घर के दरवाजे खिड़कियाँ बंद करने की जरूरत नही महसूस हुई। वह रात… अधिक पढ़ें पैसे से हर प्रकार की खुशी नही प्राप्त की जा सकती Paise se Har prakar ki Khushi Nahi prapt ki ja sakti

क्या सचमुच आत्मा होती है? Kya sachmuch aatma hoti hai ?

प्रातः काल का समय था। गुरुकुल में हर दिन की भांति गुरूजी अपने शिष्यों को शिक्षा दे रहे थे। आज का विषय था – “आत्मा ” आत्मा के बारे में हुए गुरु जी ने गीता का यह श्लोक बोला – नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः अर्थात: आत्मा को… अधिक पढ़ें क्या सचमुच आत्मा होती है? Kya sachmuch aatma hoti hai ?

सबसे बड़ा मूर्ख कौन ? Sabse bada murkh kaun ?

किसी गांव में एक सेठ रहता था। उसका एक ही बेटा था , जो व्यापार के काम से परदेस गया हुआ था। सेठ की बहू एक दिन कुएँ पर पानी भरने गई। घड़ा जब भर गया तो उसे उठाकर कुएँ के मुंडेर पर रख दिया और अपना हाथ-मुँह धोने लगी। तभी कहीं से चार राहगीर… अधिक पढ़ें सबसे बड़ा मूर्ख कौन ? Sabse bada murkh kaun ?

रिश्ते हमारी सम्पत्ति भी है और जिम्मेदारी भी rishtey hamari sampatti bhi hai aur jimmedari bhi

हर इंसान के पास एक संपत्ति बहुत बड़ी है जिसका नाम है परिवार। परिवार और रिश्ते हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। इस के लिए कोई भी कीमत चुकाई जा सकती है। जो इसका मूल्य समझ जाए वो संसार को भी समझ जाएगा। कर्तव्य और हमारे बीच या यूं कहें धर्म और हमारे बीच की ही… अधिक पढ़ें रिश्ते हमारी सम्पत्ति भी है और जिम्मेदारी भी rishtey hamari sampatti bhi hai aur jimmedari bhi