आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

 किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था। परमात्मा में आस्था रखने वाला था । वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में नहाने जाया करता था। नहा धो कर पूजा पाठ किया करता था। रोज की तरह वह एक दिन गंगा में नहाने गया नहा… अधिक पढ़ें आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

एक बच्चे की सीख ek bacche ki Sikh

बायजीद नाम का एक मुसलमान फकीर हुआ है। वह गांव से गुजर रहा था। सांझ का समय था , वह रास्ता भटक गया। तभी उसने एक बच्चे को हाथ में दीपक ले जाते हुए देखा। उसने बच्चे को रोककर पूछा , ‘ यह दीया किसने जलाया और इसे लेकर तुम कहां जा रहे हो ?… अधिक पढ़ें एक बच्चे की सीख ek bacche ki Sikh

मां ने दिया अद्भुत शिक्षाप्रद ज्ञान maa ne Diya adbhut shikshaprad gyan

राजा गोपीचंद का मन गुरु गोरखनाथ के उपदेश सुनकर सांसारिकता से उदासीन हो गया। मां से अनुमति लेकर गोपीचंद साधु बन गए। साधु बनने के बहुत दिन बाद एक बार वह अपने राज्य लौटे और भिक्षापात्र लेकर अपने महल में भिक्षा के लिए आवाज लगाई। आवाज सुन उनकी मां भिक्षा देने के लिए महल से… अधिक पढ़ें मां ने दिया अद्भुत शिक्षाप्रद ज्ञान maa ne Diya adbhut shikshaprad gyan

मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

एक सेठ थे। उनकी कोठी के बाहर सड़क के किनारे एक मोची बैठता था जो जूते मरम्मत करने के दौरान बीच – बीच में भजन या कोई गीत गुनगुनाता रहता था , लेकिन सेठ जी का ध्यान कभी मोची के गानों पर नहीं गया। एक बार सेठ जी बीमार पड़ गए। बिस्तर पकड़ लिया ।… अधिक पढ़ें मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

राजा होने के कारण देवराज इंद्र को अपने आप पर बहुत घमंड आ चूका था तथा अन्य देवताओ को वे अपने समक्ष तुच्छ समझते थे। अपनी राजगद्दी को भी लेकर वे इतने आशंकित रहते थे की यदि कोई ऋषि मुनि तपश्या में बैठे तो वे आतंकित हो जाते थे , कहीं वो वरदान में त्रिदेवो से इन्द्रलोक का सिहासन ना मांग ले। ऐसे ही… अधिक पढ़ें शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

विचारों के सहारे मन का मेला होना vicharon ke sahare Man Ka Mela hona

एक वृद्ध भिक्षु और एक युवा भिक्षु दोनों नदी किनारे से चले जा रहे थे , तभी उन्होंने देखा कि एक युवती नदी में डूब रही है और बचाओ बचाओ के लिए आवाज दे रही है। युवा भिक्षु तुरंत नदी में कुदा और युवती को नदी से बाहर निकाल लाया। इस तरह से उसने उस… अधिक पढ़ें विचारों के सहारे मन का मेला होना vicharon ke sahare Man Ka Mela hona

अन्न का अपमान Anna ka apman

एक युवा भारतीय अमीर अपने मित्रों सहित मौज-मस्ती के लिए जर्मनी गया। उनकी नजर में जर्मनी एक विकसित देश था, इसलिए वहां के लोग विलासिता का जीवन जीते थे। डिनर के लिए वे एक रेस्त्रां में पहुंचे। वहां एक मेज पर एक युवा जोड़े को मात्र दो पेय पदार्थ और दो व्यंजन के साथ भोजन… अधिक पढ़ें अन्न का अपमान Anna ka apman

शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

कलाप्रस्तर नामक एक मूर्तिकार बेहद सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। उसने अपने बेटे अहं को भी मूर्तिकला का ज्ञान देना शुरू किया। कुछ वर्षों में बेटा भी मूर्तियां बनाने में निपुण हो गया। अब पिता – पुत्र दोनों बाजार जाते और मूर्तियां बेचकर आ जाते। कुछ समय बाद प्रस्तर ने अहं की मूर्तियों को अलग… अधिक पढ़ें शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

देनेवाला जब भी देता , देता छप्पर फाड़ के dene wala jab Bhi deta , deta chappar phadke

 एक गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था , वह बहुत ही ईमानदार और भोला-भाला था , वह सदा ही दूसरों की सहायता करने के लिए तैयार रहता था। एक बार की बात है कि शाम के समय वह दिशा मैदान (शौच) के लिए खेत की ओर गया , दिशा मैदान करने के… अधिक पढ़ें देनेवाला जब भी देता , देता छप्पर फाड़ के dene wala jab Bhi deta , deta chappar phadke

कछुआ मुझे सदैव ही प्रेरणा देता हैं kachhua mujhe sadaiv hi prerna deta hai

एक साधु गंगा किनारे झोपड़ी बनाकर रहते थे। सोने के लिए बिस्तर , पानी पीने के लिए मिट्टी का घड़ा और दो कपड़े- बस , यही उनकी जमा-पूंजी थी। उन्होंने एक कछुआ पाल रखा था। सुबह स्नान कर वे पास की बस्ती में जाते और वहां कोई न कोई गृहस्थ उन्हें रोटी दे देता। कछुए… अधिक पढ़ें कछुआ मुझे सदैव ही प्रेरणा देता हैं kachhua mujhe sadaiv hi prerna deta hai