पिता ने पुत्र को जीवन के आठ अनमोल रहस्य बताये pita ne Putra ko jivan ke aath Anmol Rahasya bataen

एक सेठ जी अंतिम समय में बेटे को सीख देते हैं। कहते हैं – यह आठ बातों का ध्यान से सुन कर जीवन में उतारोगे तो कहीं भी ठोकर या कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। सदा आनंद में रहोगे। कोई भी समस्या आ भी जाए तो उससे निपटने में सक्षम बन जाओगे।पहली बात – हमेशा मीठा… अधिक पढ़ें पिता ने पुत्र को जीवन के आठ अनमोल रहस्य बताये pita ne Putra ko jivan ke aath Anmol Rahasya bataen

धर्मसाधना के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सानुकूल परिवार का होना बहुत जरूरी है Dharm Sadhna ke Marg mein aage badhane ke liye Sonukul Parivar Ka hona bahut jaruri hai

विमल मंत्री नि:संतान थे। एक और उन्हें संतान की कामना थी तो दूसरी और उनके दिल में आबू के पर्वतों पर देवाधिदेव वीतराग परमात्मा का भव्यातिभव्य जिन मंदिर के निर्माण की अदम्य लालसा थी। अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए अंबिका देवी की आराधना की। देवी ने कहा , ‘ विमल ! तेरा भाग्य अपूर्ण… अधिक पढ़ें धर्मसाधना के मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सानुकूल परिवार का होना बहुत जरूरी है Dharm Sadhna ke Marg mein aage badhane ke liye Sonukul Parivar Ka hona bahut jaruri hai

परनारी पर कुदृष्टि डालना अपने ही तप पूंजी को नष्ट करना है Pernari per Ku Drishti dalna Apne hi tap punji ko nasht karna hai

अध्यात्म विज्ञान के सिद्धांतों के अंतर्गत एक नियम यह भी है कि “ तप से तेज की उत्पत्ति होती है ”। यह बात सतयुग में जितनी सार्थक थी , उतनी ही आज भी सार्थक है । साधना के साथ जो संयम और नियम के कड़े प्रतिबंध लगाये गये है , वह तप के ही साधन… अधिक पढ़ें परनारी पर कुदृष्टि डालना अपने ही तप पूंजी को नष्ट करना है Pernari per Ku Drishti dalna Apne hi tap punji ko nasht karna hai

मात्र नारायण कहने से पापी का कल्याण हो गया Matra Narayan kahane se paapi ka Kalyan Ho Gaya

इस कथा के श्रवण करने वाले को यम भी तंग नहीं करता। वह ऊंचे चाल-चलन वाला बनता है। सुनने वाले के पाप मिटते हैं। उसका कल्याण होता है , उसे मोक्ष मिलता है। अजामल पुरातन समय का बहुत बड़ा पापी माना गया है। वह पापी किसलिए था? उसने क्या कसूर किया था? इसकी कथा इस… अधिक पढ़ें मात्र नारायण कहने से पापी का कल्याण हो गया Matra Narayan kahane se paapi ka Kalyan Ho Gaya

भक्त ध्रुव से ध्रुवतारा बनने की कथा Bhakt dhruv se dhruvTara banne ki katha

जो भक्ति करता है वह उत्तम पदवी, मोक्ष तथा प्रसिद्धि को प्राप्त करता हैं। यह सब भगवान की लीला है। सत् युग में एक ऐसे ही भक्त हुए हैं जिनका नाम ध्रुव था।  भक्त ध्रुव जी का जन्म राजा उतानपाद के महल में हुआ। राजा की दो रानियाँ थी। भक्त ध्रुव की माता का नाम… अधिक पढ़ें भक्त ध्रुव से ध्रुवतारा बनने की कथा Bhakt dhruv se dhruvTara banne ki katha

एक त्याग रहा था , दूसरा ले रहा था Ek tyag raha tha , dusra le raha tha

बहुत पुरानी कहानी है। एक ब्राह्मण पंडित जगह-जगह जाकर गीता का पाठ सुनाया करते थे। एक बार वे अपने गांव से दूर दूसरे गांव के सेठ के निमंत्रण पर उन्हें गीता – पाठ सुनाने के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक नदी आई वहां एक मगरमच्छ रहता था। उसने ब्राह्मण से गीता – पाठ… अधिक पढ़ें एक त्याग रहा था , दूसरा ले रहा था Ek tyag raha tha , dusra le raha tha

वैराग्य से सब सुख आसानी से मिल जाता है Vairagya se sab aasani se mil jata hai

वैराग्य का आना स्वाभाविक है। उम्र बढ़ने के साथ , तुम्हारा मन स्वतः ही छोटी-छोटी बातों में नहीं अटकता है। जैसे बचपन में तुम्हें लौलीपॉप से लगाव था , पर वह लगाव स्कूल या कॉलेज आने पर स्वतः ही छूट गया। बड़े होने पर भी दोस्त तो रहते हैं पर उनके साथ उतना मोह नहीं… अधिक पढ़ें वैराग्य से सब सुख आसानी से मिल जाता है Vairagya se sab aasani se mil jata hai

ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे। यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र मानती थीं , तथापि रानी सुरुचि… अधिक पढ़ें ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

बुद्ध के पास एक राजकुमार दीक्षित हो गया , दीक्षा के दूसरे ही दिन किसी श्राविका के घर उसे भिक्षा लेने बुद्ध ने भेज दिया। वह वहां गया। रास्ते में दो – तीन घटनाएं एसी घटीं , लौटते में उनसे वह बहुत परेशान हो गया। रास्ते में उसके मन में खयाल आया कि मुझे जो… अधिक पढ़ें आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

नफरत या अत्याचार कभी प्रेम को समाप्त नहीं कर सकते Nafrat yah atyachar Kabhi prem ko samapt Nahin kar sakte

महावीर स्वामी तपस्या में लीन थे। एक दुष्ट उनके पीछे लग गया। कई बार उसने महावीर स्वामी का अपमान किया , लेकिन वे सदैव शांत ही रहते। उन्होंने तो संसार को प्रेम का पाठ पढ़ाया था। वे कहते थे सदा प्रेम करो , प्रेम में ही परमतत्व छिपा है। जो तुम्हारा अहित करे उसे भी… अधिक पढ़ें नफरत या अत्याचार कभी प्रेम को समाप्त नहीं कर सकते Nafrat yah atyachar Kabhi prem ko samapt Nahin kar sakte