ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

राजा उत्तानपाद ब्रह्माजी के मानस पुत्र स्वयंभू मनु के पुत्र थे। उनकी सनीति एवं सुरुचि नामक दो पत्नियाँ थीं। उन्हें सुनीति से ध्रुव एवं सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र प्राप्त हुए। वे दोनों राजकुमारों से समान प्रेम करते थे। यद्यपि सुनीति ध्रुव के साथ-साथ उत्तम को भी अपना पुत्र मानती थीं , तथापि रानी सुरुचि… अधिक पढ़ें ध्रुवतारे की निस्वार्थ भक्ति की प्रेरणादायक कथा Dhruv tare ki niswarth bhakti ki prernadayak katha

आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

बुद्ध के पास एक राजकुमार दीक्षित हो गया , दीक्षा के दूसरे ही दिन किसी श्राविका के घर उसे भिक्षा लेने बुद्ध ने भेज दिया। वह वहां गया। रास्ते में दो – तीन घटनाएं एसी घटीं , लौटते में उनसे वह बहुत परेशान हो गया। रास्ते में उसके मन में खयाल आया कि मुझे जो… अधिक पढ़ें आत्म क्रांति से ही विवेक जागरण संभव है Aatm kranti se Vivek jagran sambhav hai

नफरत या अत्याचार कभी प्रेम को समाप्त नहीं कर सकते Nafrat yah atyachar Kabhi prem ko samapt Nahin kar sakte

महावीर स्वामी तपस्या में लीन थे। एक दुष्ट उनके पीछे लग गया। कई बार उसने महावीर स्वामी का अपमान किया , लेकिन वे सदैव शांत ही रहते। उन्होंने तो संसार को प्रेम का पाठ पढ़ाया था। वे कहते थे सदा प्रेम करो , प्रेम में ही परमतत्व छिपा है। जो तुम्हारा अहित करे उसे भी… अधिक पढ़ें नफरत या अत्याचार कभी प्रेम को समाप्त नहीं कर सकते Nafrat yah atyachar Kabhi prem ko samapt Nahin kar sakte

महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय ‘चिंतामणि ‘ प्रदान की। चंद्रसेन ने इसे गले में धारण किया तो उसका प्रभामंडल तो जगमगा ही उठा , साथ ही दूरस्थ… अधिक पढ़ें महाकालेश्वर की कथा mahakaleshwar ki katha

सभी का भला सोचने वाला सदा ही सुख पाता है। Sabhi ka bhala sochne wala sada hi sukh pata hai.

रामानुजाचार्य प्राचीन काल में हुए एक प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका जन्म मद्रास नगर के समीप पेरुबुदूर गाँव में हुआ था। बाल्यकाल में इन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया। रामानुज के गुरु ने बहुत मनोयोग से शिष्य को शिक्षा दी। शिक्षा समाप्त होने पर वे बोले – ‘ पुत्र , मैं तुम्हें एक मंत्र… अधिक पढ़ें सभी का भला सोचने वाला सदा ही सुख पाता है। Sabhi ka bhala sochne wala sada hi sukh pata hai.

संत ज्ञानेश्वर ने किया चांगदेव के अहंकार का नाश Sant gyaneshwar ne Kiya changdev ke ahankar ka naash

चांगदेव नाम के एक हठयोगी थे इन्होंने योग सिद्धि से अनेको सिद्धियाँ प्राप्त कर रखी थी तथा मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कर ली थी उनकी उम्र 1400 वर्ष हो गई थी। चांगदेव को यश-प्रतिष्ठा का बहुत मोह था। वह अपने आप को सबसे महान मानते थे। इन्होंने जब संत ज्ञानेश्वर की प्रशंसा सुनी तो… अधिक पढ़ें संत ज्ञानेश्वर ने किया चांगदेव के अहंकार का नाश Sant gyaneshwar ne Kiya changdev ke ahankar ka naash

जैसी होगी भावना वैसा ही फल मिलेगा jaisi hogi Bhavna vaisa hi fal milega

आप भगवान का स्मरण करोगे तो भगवान आपका स्मरण करेंगे क्योंकि वे चैतन्य स्वरूप हैं। आप पैसों का , बँगले का स्मरण करोगे तो जड़ पैसों को , जड़ बँगले को तो पता नहीं है कि आप उनका स्मरण कर रहे हो। आप गाड़ी का स्मरण करोगे तो वह अपने-आप नहीं मिलेगी लेकिन भगवान का… अधिक पढ़ें जैसी होगी भावना वैसा ही फल मिलेगा jaisi hogi Bhavna vaisa hi fal milega

भगवान की भक्ति ही शरीर का सदुपयोग है bhagwan ki bhakti hi sharir ka sadupyog hai

हर जीव परमात्मा का ही अंश है जो परमात्मा से बिछड़ गया है। इसलिए हर जीव परमात्मा को प्राप्त करने के लिए छटपटा रहा है। परामात्मा से मिलने का आनंद जीव सांसारिक पदार्थों में ढूंढ़ा करता है। किन्तु क्षणभंगुर संसार में वह शाश्वत परम आनंद मिल ही नहीं पाता , क्षणभंगुर विषयों के आनंद में… अधिक पढ़ें भगवान की भक्ति ही शरीर का सदुपयोग है bhagwan ki bhakti hi sharir ka sadupyog hai

निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

महात्मा बुद्ध एक गाँव में ठहरे हुए थे। वे प्रतिदिन शाम को वहाँ पर सत्संग करते थे। भक्तों की भीड़ होती थी , क्योंकि उनके प्रवचनों से जीवन को सही दिशा बोध प्राप्त होता था। बुद्ध की वाणी में गजब का जादू था। उनके शब्द श्रोता के दिल में उतर जाते थे। एक युवक प्रतिदिन… अधिक पढ़ें निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai

हिन्दू सनातन धर्म में प्रायः त्रिदेवो ब्रह्मा , विष्णु तथा महेश को अन्य देवो में प्रधानता दी गयी है जिनमे ब्रह्माजी सृष्टि के रचियता है , भगवान विष्णु पालनहार व भगवान शिव संहारकर्ता है।  भारत में आपको भगवान विष्णु और शिव के असंख्य मंदिर बड़े आसनी से मिल जायेंगे परन्तु ब्रह्मा जी का मंदिर आपको भारत ही नही बल्कि पूरी दुनिया में सिर्फ… अधिक पढ़ें पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai