निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

महात्मा बुद्ध एक गाँव में ठहरे हुए थे। वे प्रतिदिन शाम को वहाँ पर सत्संग करते थे। भक्तों की भीड़ होती थी , क्योंकि उनके प्रवचनों से जीवन को सही दिशा बोध प्राप्त होता था। बुद्ध की वाणी में गजब का जादू था। उनके शब्द श्रोता के दिल में उतर जाते थे। एक युवक प्रतिदिन… अधिक पढ़ें निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai

हिन्दू सनातन धर्म में प्रायः त्रिदेवो ब्रह्मा , विष्णु तथा महेश को अन्य देवो में प्रधानता दी गयी है जिनमे ब्रह्माजी सृष्टि के रचियता है , भगवान विष्णु पालनहार व भगवान शिव संहारकर्ता है।  भारत में आपको भगवान विष्णु और शिव के असंख्य मंदिर बड़े आसनी से मिल जायेंगे परन्तु ब्रह्मा जी का मंदिर आपको भारत ही नही बल्कि पूरी दुनिया में सिर्फ… अधिक पढ़ें पूरी दुनिया में यही पर ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है Puri duniya mein yahi per Brahma ji ka ekmatra mandir hai

अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

श्रमण हरिकेशबल चांडाल कुल में उत्पन्न हुए थे। बचपन में जातिवाद के शिकार हुए। उन्हें संसार से घृणा हुई और वे श्रमण बन गए। एक दिन हरिकेशबल ध्यान में लीन थे। राजकुमारी भद्रा मंदिर में पूजन कर बाहर निकली थी। अचानक भद्रा की नजर हरिकेशबल पर पड़ी। हरिकेशबल का काला – कलूटा शरीर देखकर राजकुमारी… अधिक पढ़ें अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

रामेश्वरम का अभिषेक rameshwaram ka Abhishek

संत एकनाथ काशी से रामेश्वरम् की ओर जा रहे थे। साथ में और भी संत थे। सभी संत अपने – अपने कंधों पर शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए गंगाजल ले जा रहे थे। कुछ दिनों तक चलने के बाद मार्ग में मरुस्थल आया। मरुस्थल में एक गधा प्यास से तड़प रहा था। सभी संत झुंड… अधिक पढ़ें रामेश्वरम का अभिषेक rameshwaram ka Abhishek

अंतिम रात antim Raat

भगवान बुद्ध निर्वाण के करीब थे। शिष्य आनंद की आंखों से आंसू झर रहे थे। उन्हें कुछ दूरी पर अंधेरा दिखाई दे रहा था। आनंद ने बुद्ध की रोशनी में थी अब तक यात्रा की थी। सुबह – शाम , रात – दिन एक क्षण भी वे बुद्ध से दूर ना हुए थे। तीस वर्ष… अधिक पढ़ें अंतिम रात antim Raat

गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

इंद्रभूति गौतम तीर्थंकर महावीर के परम शिष्य थे। महावीर प्राय: उन्हें कहा करते थे , ‘ शिष्य , होश संभालो। ‘ गौतम के लिए महावीर सर्वोपरि थे। एक क्षण के लिए भी महावीर का त्याग उनके लिए असहनीय था। परमात्मा से प्रेम किया जाता है , पर गौतम ने तो राग – श्रृंखलाएं निर्मित कर… अधिक पढ़ें गौतम प्रभु को राग – मुक्त किया Gautam Prabhu ko raag – mukt Kiya

परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

तीर्थंकर महावीर कुमारग्राम के बाहर ध्यानस्थ थे। वही एक ग्वाला आया। महावीर के निकट पहुंचकर उसने अपनी गायों को गिना तो दो गायें कम थी। उसने ध्यानस्थ महावीर से कहा , ‘ साधो ! मेरी दो गायें पीछे छूट गई है। मैं उन्हें लेने जाता हूं। जरा इन गायों का ध्यान रखना।’ महावीर से बिना… अधिक पढ़ें परमज्ञान किसी की सहायता से प्राप्त नहीं किया जा सकता है Param gyan Kisi ki sahayata se a prapt nahin kiya ja sakta hai

लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

अभिनिष्क्रमण से पूर्व जब तीर्थंकर महावीर वर्षी दान दे रहे थे , तब सोमभट्ट ब्राह्मण जीविकोपार्जन के लिए विदेश गया हुआ था , पर भाग्य का मारा वह खाली हाथ लौटा। पत्नी ने कहा , ‘ अब क्या आए हो ! जब यहां धन लूटा रहे थे महावीर , तब तुम बाहर थे और जब… अधिक पढ़ें लाभ लोभ को पैदा करता है labh lobh ko paida karta hai

कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

ऋषभ के साथ आमोद – प्रमोद करने के लिए देव- देवेंद्र- विद्याधर आया करते थे। आज ऋषभ का जन्म – दिवस था। स्वयं देवेंद्र देवलोक की नृत्यांगना नीलांजना के साथ ऋषभ को बधाई देने पहुंचे थे। ऋषभ और देवेंद्र अपने मित्रों और सहचरों के साथ नीलांजना का भावविभोर नृत्य देख रहे थे। देवेंद्र ने देखा… अधिक पढ़ें कुछ नहीं पर बहुत कुछ हो गया Kuchh Nahin per bahut kuchh ho Gaya

महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap

महाभारत युद्ध समाप्ति की ओर था , युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया। अपनी आखरी सांसे ले रहा दुर्योधन अश्वत्थामा से बोला की तुम यह कार्य निति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक पर मुझे पांचो पांडवो का कटा हुआ शीश देखना है। दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने… अधिक पढ़ें महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ? Mahabharat ki ant mein Mahadev Shiv ne pandavon ko diya tha punarjanm ka shrap