जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

एक बार सभी देवता नारद के विषय में चर्चा कर रहे थे। वे सभी नारद जी के बिना बुलाये कहीं भी बार – बार आ जाने को लेकर बहुत परेशान थे। उन्होंने निश्चय किया की वे अपने द्वारपालों से कहकर नारद जी को किसी भी दशा में अंदर प्रवेश नही करने देंगे और किसी न किसी बहाने से उन्हें टाल देंगे।… अधिक पढ़ें जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

हिन्दू धर्म में पूरणो और वेदो  के अनुसार ॐ नमः शिवाय का मन्त्र खुद में इतना सर्वशक्तिमान , सर्वशक्तिशाली तथा सम्पूर्ण ऊर्जा का श्रोत है की मात्र इसके उच्चारण से ही समस्त दु:खो , कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है। ॐ अक्षर के बिना किसी घर की पूजा पूर्ण नही मानी जाती… अधिक पढ़ें क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

एक सेठ थे। उनकी कोठी के बाहर सड़क के किनारे एक मोची बैठता था जो जूते मरम्मत करने के दौरान बीच – बीच में भजन या कोई गीत गुनगुनाता रहता था , लेकिन सेठ जी का ध्यान कभी मोची के गानों पर नहीं गया। एक बार सेठ जी बीमार पड़ गए। बिस्तर पकड़ लिया ।… अधिक पढ़ें मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

विश्वास ही जीवन की पूंजी है Vishwas hi jivan ki punji hai

एक डाकू था जो साधु के भेष में रहता था। वह लूट का धन गरीबों में बाँटता था। एक दिन कुछ व्यापारियों का जुलूस उस डाकू के ठिकाने से गुज़र रहा था। सभी व्यापारियों को डाकू ने घेर लिया। डाकू की नज़रों से बचाकर एक व्यापारी रुपयों की थैली लेकर नज़दीकी तंबू में घुस गया।… अधिक पढ़ें विश्वास ही जीवन की पूंजी है Vishwas hi jivan ki punji hai

मृत्यु आती है तो कोई परिजन आदि काम नहीं आते mrutyu aati hai to koi parijan adhik kam nahin aata

पतचरा श्रावस्ती के नगरसेठ की पुत्री थी। किशोरवय होने पर वह अपने घरेलू नौकर के प्रेम में पड़ गई। जब उसके माता – पिता उसके विवाह के लिए उपयुक्त वर खोज रहे थे तब वह नौकर के साथ भाग गई। दोनों अपरिपक्व पति – पत्नी एक छोटे से नगर में जा बसे। कुछ समय बाद… अधिक पढ़ें मृत्यु आती है तो कोई परिजन आदि काम नहीं आते mrutyu aati hai to koi parijan adhik kam nahin aata

पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

   राजा शर्याति अपने परिवार समेत एक बार वन विहार के लिए गए। एक सुरम्य सरोवर के निकट पड़ाव पड़ा। बच्चे इधर – उधर खेल , विनोद करते हुए घूमने लगे। मिट्टी के ढेर के नीचे से दो तेजस्वी मणियाँ जैसी चमकती देखीं तो राजकन्या को कुतूहल हुआ। उसने लकड़ी के सहारे उन चमकती वस्तुओं… अधिक पढ़ें पाप की मुक्ति तो प्रायश्चित से ही होती है। Paap ki Mukti to praschit se hi hoti hai.

परमपिता परमेश्वर ही सर्वशक्तिमान है parampita parmeshwar hi sarvashaktiman hai

एक बार दैत्यों पर विजय प्राप्त कर लेने से , देवताओं को अहंकार हो गया। उस सर्वशक्तिमान् ने सोचा कि उनका यह बढा हुआ अहंकार दूर करना चाहिये। उसने एक बृहद् रूप धारण किया और देवताओं के सम्मुख अचानक प्रकट हो गया। उस विचित्र अलौकिक आकृति को देखकर देवता चकित रह गये। वायु देवता को… अधिक पढ़ें परमपिता परमेश्वर ही सर्वशक्तिमान है parampita parmeshwar hi sarvashaktiman hai

उत्कृष्ट भावना से ही भगवान की भक्ति की जानी चाहिए utkrusht Bhavna se hi bhagwan ki bhakti ki jaani chahie

आखेट की खोज में भटकता विश्वबंधु शवर नील पर्वत की एक गुफा में जा पहुँचा। वहाँ भगवान नील – माधव की मूर्ति के दर्शन पाते ही शवर के हृदय में भक्ति भावना स्रोत उमड़ पड़ा। वह हिंसा छोड़ कर भगवान नील की रात – दिन पूजा करने लगा। उन्हीं दिनों मालवराज इंद्रप्रद्युम्न किसी अपरिचित तीर्थ… अधिक पढ़ें उत्कृष्ट भावना से ही भगवान की भक्ति की जानी चाहिए utkrusht Bhavna se hi bhagwan ki bhakti ki jaani chahie

लालच और वैराग्य lalach aur vairagya

भतृहरि जंगल में बैठे साधना में लीन थे। अचानक उनका ध्यान भंग हुआ। आंख खुली तो देखा जमीन पर पड़ा एक हीरा सूर्य की रोशनी को भी फीकी कर रहा है। एक समय था जब भतृहरि राजा थे। अनेक हीरे – मोती उनकी हथेलियों से होकर गुजरे थे। लेकिन ऎसा चमकदार हीरा , तो उन्होंने… अधिक पढ़ें लालच और वैराग्य lalach aur vairagya

एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.

एक बार महात्मा बुद्ध किसी गांव में गए। वहां एक स्त्री ने उनसे पूछा कि आप तो किसी राजकुमार की तरह दिखते हैं , आपने युवावस्था में गेरुआ वस्त्र क्यों धारण किया है ? बुद्ध ने उत्तर दिया कि मैंने तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए संन्यास लिया है। बुद्ध ने कहा – हमारा… अधिक पढ़ें एक हाथ से ताली नहीं बज सकती। Ek hath se Tali Nahin baj sakti.