शिष्य होने का अर्थ क्या है ? Shishya hone ka arth kya hai ?

बहुत समय पहले की बात है , किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे । उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया , स्वामीजी आपके गुरु कौन है ? आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है ? महंत शिष्य का… अधिक पढ़ें शिष्य होने का अर्थ क्या है ? Shishya hone ka arth kya hai ?

ढोलक का राज dholak Ka Raj

एक गांव में एक नाई रहता था । उसका काम था लोगों की हजामत बनाना । उसकी एक बुरी आदत थी कि उसके पेट में कोई बात पचती नहीं थी । अत: इधर की बातें उधर बताने का उसे शौक था । एक बार राजा का शाही नाई बीमार पड़ गया तो राजा ने उस… अधिक पढ़ें ढोलक का राज dholak Ka Raj

हम कभी भी अपनी पूरी क्षमता का एहसास नहीं कर पाते हैं Ham kabhi bhi apni Puri kshamta ka ehsas nahin kar paate Hain

एक दार्शनिक अपने एक शिष्य के साथ कहीं से गुजर रहा था। चलते-चलते वे एक खेत के पास पहुंचे। खेत अच्छी जगह स्थित था लेकिन उसकी हालत देखकर लगता था मानो उसका मालिक उस पर जरा भी ध्यान नहीं देता है। खैर , दोनों को प्यास लगी थी सो वे खेत के बीचो-बीच बने एक… अधिक पढ़ें हम कभी भी अपनी पूरी क्षमता का एहसास नहीं कर पाते हैं Ham kabhi bhi apni Puri kshamta ka ehsas nahin kar paate Hain

सुकरात का आईना sukrat ka aaina

दार्शनिक सुकरात दिखने में कुरुप थे। वह एक दिन अकेले बैठे हुए आईना हाथ मे लिए अपना चेहरा देख रहे थे। तभी उनका एक शिष्य कमरे मे आया , सुकरात को आईना देखते हुए देख उसे कुछ अजीब लगा । वह कुछ बोला नही सिर्फ मुस्कराने लगा। विद्वान सुकरात शिष्य की मुस्कराहट देख कर सब… अधिक पढ़ें सुकरात का आईना sukrat ka aaina

ऐसे कर्म हों तो खराब किस्मत को भी बदला जा सकता है Aise karam ho to kharab kismat ko bhi badla ja sakta hai

एक बड़े ज्ञानी संत थे। उनका एक शिष्य था जो हमेशा उनके साथ रहता था। एक दिन संत ने अपने शिष्य को बुलाकर कहा कि मैं कहीं दूर योग साधना के लिए जा रहा हूं। तुम्हारी गुरु मां अभी गर्भवती हैं। उन्हें जल्दी ही संतान प्राप्ति होने वाली है। तुम उनके पास ही रहो। जब… अधिक पढ़ें ऐसे कर्म हों तो खराब किस्मत को भी बदला जा सकता है Aise karam ho to kharab kismat ko bhi badla ja sakta hai

सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था , हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख , ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन , उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था‌। एक… अधिक पढ़ें सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

त्याग और लोभ tyag aur lobh

            किसी नगर में एक सेठ रहता था। उसके पास बहुत धन था। उसकी तिजोरियां हमेशा मोहरों से भरी रहती थीं , लेकिन उसका लोभ कम नहीं होता था। जैसे-जैसे धन बढ़ता जाता था , उसकी लालसा और भी बढ़ती जाती थी।              सेठ बहुत ही कंजूस था। कभी किसी को एक कौड़ी भी नहीं… अधिक पढ़ें त्याग और लोभ tyag aur lobh

सत्य की वीणा Satya ki veena

एक संन्यासी ईश्वर की खोज में निकला हुआ था और एक आश्रम में जाकर ठहरा। पंद्रह दिन तक उस आश्रम में रहा , फिर ऊब गया। उस आश्रम का जो बूढ़ा गुरु था वह कुछ थोड़ी सी बातें जानता था , रोज उन्हीं को दोहरा देता था। फिर उस युवा संन्यासी ने सोचा , यह… अधिक पढ़ें सत्य की वीणा Satya ki veena

दानवीर राजा विक्रमादित्य danvir raja vikramaditya

एक दिन राजा विक्रमादित्य दरबार को सम्बोधित कर रहे थे तभी किसी ने सूचना दी कि एक ब्राह्मण उनसे मिलना चाहता है। विक्रमादित्य ने कहा कि ब्राह्मण को अन्दर लाया जाए। जब ब्राह्मण उनसे मिला तो विक्रम ने उसके आने का प्रयोजन पूछा। ब्राह्मण ने कहा कि वह किसी दान की इच्छा से नहीं आया… अधिक पढ़ें दानवीर राजा विक्रमादित्य danvir raja vikramaditya

ईश्वर या धन ? Ishwar ya dhan

आप क्या चाहते हैं ? एक बार एक नगर के राजा के यहाँ पुत्र पैदा हुआ। इस खुशी में राजा ने पूरे नगर में घोषणा करवा दी कि कल पूरी जनता के लिए राजदरबार खोल दिया जायेगा। जो व्यक्ति सुबह आकर सबसे पहले जिस चीज़ को हाथ लगाएगा वो उसी की हो जाएगी। पूरे राज्य… अधिक पढ़ें ईश्वर या धन ? Ishwar ya dhan