यही वो लोग हैं जो आपकी ताकत है Yahi vah log Hain jo aapki takat hai

गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों में आज काफी उत्साह था , उनकी बारह वर्षों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और अब वो अपने घरों को लौट सकते थे । गुरुजी भी अपने शिष्यों की शिक्षा-दीक्षा से प्रसन्न थे और गुरुकुल की परंपरा के अनुसार शिष्यों को आखिरी उपदेश देने की तैयारी… अधिक पढ़ें यही वो लोग हैं जो आपकी ताकत है Yahi vah log Hain jo aapki takat hai

शिष्य होने का अर्थ क्या है ? Shishya hone ka arth kya hai ?

बहुत समय पहले की बात है , किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे । उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया , स्वामीजी आपके गुरु कौन है ? आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है ? महंत शिष्य का… अधिक पढ़ें शिष्य होने का अर्थ क्या है ? Shishya hone ka arth kya hai ?

कैसी वाणी कैसा साथ ? Kaisi vani Kaisa sath ?

दवे साहेब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियो के बीच बहुत प्रसिद्द थे। उनकी वाणी , वर्तन तथा मधुर व्यवहार से कॉलेज के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियो उन्हें ‘ वेदसाहेब ’ से संबोधन करते थे। ऐसे भी वे संस्कृत के प्राध्यापक थे , और उनकी बातचीत में संस्कृत श्लोक-सुभाषित बारबार आते थे। उनकी ऐसी बात करने की शैली थी… अधिक पढ़ें कैसी वाणी कैसा साथ ? Kaisi vani Kaisa sath ?

मन का राजा Man Ka raja

राजा भोज वन में शिकार करने गए। लेकिन घूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाए गुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तो दूर ,… अधिक पढ़ें मन का राजा Man Ka raja

दूसरों की निंदा करने की प्रवृत्ति सदैव ही हानि का कारण होती है dusro ki ninda karne ki pravritti sadaiv hi Hani ka Karan hoti hai

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की। राजा ने अपने मंत्री से , जो कई भाषाओं का जानकार था , पूछा – यह क्या कह रहा है ? मंत्री ने विदेशी की गालियां सुन ली थीं , किंतु उसने… अधिक पढ़ें दूसरों की निंदा करने की प्रवृत्ति सदैव ही हानि का कारण होती है dusro ki ninda karne ki pravritti sadaiv hi Hani ka Karan hoti hai

काबिलियत की पहचान kabiliyat ki pahchan

किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था। तालाब के पास एक बागीचा था , जिसमे अनेक प्रकार के पेड़ पौधे लगे थे । दूर- दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते। गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता , उसे लगता… अधिक पढ़ें काबिलियत की पहचान kabiliyat ki pahchan

ढोलक का राज dholak Ka Raj

एक गांव में एक नाई रहता था । उसका काम था लोगों की हजामत बनाना । उसकी एक बुरी आदत थी कि उसके पेट में कोई बात पचती नहीं थी । अत: इधर की बातें उधर बताने का उसे शौक था । एक बार राजा का शाही नाई बीमार पड़ गया तो राजा ने उस… अधिक पढ़ें ढोलक का राज dholak Ka Raj

हम कभी भी अपनी पूरी क्षमता का एहसास नहीं कर पाते हैं Ham kabhi bhi apni Puri kshamta ka ehsas nahin kar paate Hain

एक दार्शनिक अपने एक शिष्य के साथ कहीं से गुजर रहा था। चलते-चलते वे एक खेत के पास पहुंचे। खेत अच्छी जगह स्थित था लेकिन उसकी हालत देखकर लगता था मानो उसका मालिक उस पर जरा भी ध्यान नहीं देता है। खैर , दोनों को प्यास लगी थी सो वे खेत के बीचो-बीच बने एक… अधिक पढ़ें हम कभी भी अपनी पूरी क्षमता का एहसास नहीं कर पाते हैं Ham kabhi bhi apni Puri kshamta ka ehsas nahin kar paate Hain

मौत से भी बड़ा भय है Maut se Bhi bada bhai hai

मैंने सुना है , एक पुरानी तिब्बती कथा है कि दो उल्लू एक वृक्ष पर आकर बैठे। एक ने सांप को अपने मुंह में पकड़ रखा था। भोजन था उसका , सुबह की नाश्ते की तैयारी थी। दूसरा एक चूहा पकड़ लाया था। दोनों जैसे ही बैठे वृक्ष पर पास – पास आकर एक के… अधिक पढ़ें मौत से भी बड़ा भय है Maut se Bhi bada bhai hai

ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai

किसी राज्य में एक प्रतापी राजा हुआ करता था। वो राजा रोज सुबह उठकर पूजा पाठ करता और गरीबों को दान देता। अपने इस उदार व्यवहार और दया की भावना की वजह से राजा पूरी जनता में बहुत लोकप्रिय हो गया था। रोज सुबह दरबार खुलते ही राजा के यहाँ गरीब और भिखारियों की लंबी… अधिक पढ़ें ईश्वर तू ही अन्नदाता है Ishwar Tu hi annadeta hai