बोलने से चुप रहना अधिक बेहतर है Bolane se chup rahana adhik behtar hai

एक बार एक बूढ़े आदमी ने अफवाह फैलाई की उसके पड़ोस में रहने वाले नौजवान चोर है। यह बात दूर – दूर तक फैल गई। आसपास के लोग उस नौजवान से बचने लगे। नौजवान परेशान हो गया क्योंकि कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करता था। तभी चोरी की वारदात हुई और शक उस नौजवान… अधिक पढ़ें बोलने से चुप रहना अधिक बेहतर है Bolane se chup rahana adhik behtar hai

सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था , हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख , ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था। यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन , उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था‌। एक… अधिक पढ़ें सबसे बड़ा पुण्य sabse bada punya

दर्पण की सीख darpan ki Sikh

पुराने जमाने की बात है। एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा भावना से बहुत प्रभावित हुए। विद्या पूरी होने के बाद शिष्य को विदा करते समय उन्होंने आशीर्वाद के रूप में उसे एक ऐसा दिव्य दर्पण भेंट किया , जिसमें व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी। शिष्य उस दिव्य… अधिक पढ़ें दर्पण की सीख darpan ki Sikh

अपना अपना देखने का नजरिया apna apna dekhne ka najriya

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ नदी में स्नान कर रहे थे। तभी एक राहगीर वंहा से गुजरा तो महात्मा को नदी में नहाते देख वो उनसे कुछ पूछने के लिए रुक गया। वो संत से पूछने लगा महात्मन एक बात बताईये कि यंहा रहने वाले लोग कैसे है क्योंकि मैं अभी अभी… अधिक पढ़ें अपना अपना देखने का नजरिया apna apna dekhne ka najriya

व्यसन कोई भी ऐसा नहीं जिसे छोड़ा ना जा सके vyasan koi bhi aisa Nahin jise chhoda Na ja sake

एक समय शराब का एक व्यसनी एक संत के पास गया और विनम्र स्वर में बोला , ‘ गुरूदेव , मैं इस शराब के व्यसन से बहुत ही दु:खी हो गया हूँ। इसकी वजह से मेरा घर बरबाद हो रहा है। मेरे बच्चे भूखे मर रहे हैं , किन्तु मैं शराब के बगैर नही रह… अधिक पढ़ें व्यसन कोई भी ऐसा नहीं जिसे छोड़ा ना जा सके vyasan koi bhi aisa Nahin jise chhoda Na ja sake

हम सभी आशा पर जीते हैं ham sabhi Asha per jite Hain

सभी भिक्षु एकत्र थे। परस्पर चर्चा के दौरान एक ने कहा , ‘ सारा नगर बुद्ध के प्रवचन में उपस्थित हुआ है , लेकिन राजपुरोहित कट्टरपंथी है , इसीलिए वह कभी भी प्रवचन सभा में नहीं आया है । हमें ऐसी कोशिश करनी चाहिए ताकि राजपुरोहित अह्रत् की सन्निधि में उपस्थित हो। ‘ कोई कुछ… अधिक पढ़ें हम सभी आशा पर जीते हैं ham sabhi Asha per jite Hain

सीमा पंथ की , संप्रदाय की और जाति की , Seema pant ki , samprday ki aur jaati ki ,

राजा ने संतो और महंतों के लिए एक दिन विशेष भोज का आयोजन किया। भोजन उपरांत राजा ने घोषणा की , ‘ मैं अपने नगर के बाहर प्रबुद्ध पुरुषों का एक उपनिवेश बसाना चाहता हूं । राजधानी के बाहर , झील के पीछे जंगल में जो जितनी भूमि घेरना चाहे , घेर ले और अपनी… अधिक पढ़ें सीमा पंथ की , संप्रदाय की और जाति की , Seema pant ki , samprday ki aur jaati ki ,

सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

दार्शनिक मौलुंकपुत्र तथागत बुद्ध के पास गया और पूछा , ‘ क्या ईश्वर है ? बुद्ध ने कहा , ‘ तुम्हारे प्रश्न का उत्तर अवश्य दूंगा , पर पहले यह बताओ कि यह तुम्हारी बौध्दिक उपज है या सत्य जानने का प्रयास। ‘ मौलुंकपुत्र ने कहा , ‘ बौद्धिक खुजलाहट बहुत कर चुका हूं। अब… अधिक पढ़ें सत्य और शांति की खोज Satya aur shanti ki khoj

क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

हिन्दू धर्म में पूरणो और वेदो  के अनुसार ॐ नमः शिवाय का मन्त्र खुद में इतना सर्वशक्तिमान , सर्वशक्तिशाली तथा सम्पूर्ण ऊर्जा का श्रोत है की मात्र इसके उच्चारण से ही समस्त दु:खो , कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है। ॐ अक्षर के बिना किसी घर की पूजा पूर्ण नही मानी जाती… अधिक पढ़ें क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman

कलाप्रस्तर नामक एक मूर्तिकार बेहद सुंदर मूर्तियां बनाया करता था। उसने अपने बेटे अहं को भी मूर्तिकला का ज्ञान देना शुरू किया। कुछ वर्षों में बेटा भी मूर्तियां बनाने में निपुण हो गया। अब पिता – पुत्र दोनों बाजार जाते और मूर्तियां बेचकर आ जाते। कुछ समय बाद प्रस्तर ने अहं की मूर्तियों को अलग… अधिक पढ़ें शिल्पकार का अभिमान shilpkar ka abhiman