लज्जा ही नारी का सच्चा आभूषण है। Lajja hi nari ka saccha abhushan hai.

मगध की सौंदर्य साम्राज्ञी वासवदत्ता उपवन विहार के लिए निकली। उसका साज शृंगार उस राजवधू की तरह था जो पहली बार ससुराल जाती है। एकाएक दृष्टि उपवन – ताल के किनारे स्फटिक शिला पर बैठे तरुण संन्यासी उपगुप्त पर गई। चीवरधारी ने बाह्य सौंदर्य को अंतर्निष्ठ कर लिया था और उस आनंद में कुछ ऐसा… अधिक पढ़ें लज्जा ही नारी का सच्चा आभूषण है। Lajja hi nari ka saccha abhushan hai.

मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun

एक बौद्ध धर्मगुरु थे। उनके दर्शनों के लिए लोग अक्सर आश्रम में आते थे। स्वामीजी बड़ी उदारता से सबसे मिलते – बात करते और उनकी समस्याओं का समाधान करते। रोज स्वामीजी के पास दर्शनार्थी की भीड़ लगी रहती थी। स्वामीजी की प्रशंसा सुनकर एक साधारण ग्रामीण बहुत प्रभावित हुआ। वह भी स्वामीजी के दर्शानार्थ आश्रम… अधिक पढ़ें मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun

बिजली से पीड़ित एक आम नागरिक की कथा। Bijali se pidit ek aam nagrik ki katha.

बिजली विभाग के दफ्तर के बाहर राजू केले बेच रहा था।बिजली विभाग के एक बड़े अधिकारी ने पूछा : ” केले कैसे दिए” ?राजू: केले किस लिए खरीद रहे हैं साहब ?अधिकारी:- मतलब ??राजू:- मतलब ये साहब कि,*मंदिर* के प्रसाद के लिए ले रहे हैं तो 10 रुपए दर्जन।*वृद्धाश्रम* में देने हों तो 15 रुपए… अधिक पढ़ें बिजली से पीड़ित एक आम नागरिक की कथा। Bijali se pidit ek aam nagrik ki katha.

अपने हितैषियों की रक्षा करने से हमारी भी रक्षा होती है। Apne hiteshiyo ki raksha karne se hamari bhi raksha hoti hai.

किसी पर्वत प्रदेश में मन्दविष नाम का एक वृद्ध सर्प रहा करता था। एक दिन वह विचार करने लगा कि ऐसा क्या उपाय हो सकता है , जिससे बिना परिश्रम किए ही उसकी आजीविका चलती रहे। उसके मन में तब एक विचार आया। वह समीप के मेंढकों से भरे तालाब के पास चला गया। वहां… अधिक पढ़ें अपने हितैषियों की रक्षा करने से हमारी भी रक्षा होती है। Apne hiteshiyo ki raksha karne se hamari bhi raksha hoti hai.

मेरा दिल एक जानवर का है इंसान का नहीं। Mera dil ek janwar ka hai insan ka Nahin.

मधु एक बकरी थी , जो की माँ बनने वाली थी। माँ बनने से पहले ही मधू ने भगवान् से दुआएं मांगने शुरू कर दी। कि “ हे भगवान् मुझे बेटी देना बेटा नही ”। पर किस्मत को ये मन्जूर ना था , मधू ने एक बकरे को जन्म दिया , उसे देखते ही मधू… अधिक पढ़ें मेरा दिल एक जानवर का है इंसान का नहीं। Mera dil ek janwar ka hai insan ka Nahin.

धर्म कार्य कब करना ? आज… आज… और… अभी dharm karya kab karna ? aaj… aaj… aur… abhi

एक राजा था , उसकी एक रानी , एक पुत्री और एक दासी थी । जैनधर्म के रंग (प्रभाव) में रंगा यह पूरा परिवार वैरागी था , यहाँ तक कि दासी भी वैराग्य में जागृत थी । एक बार किसी प्रसंग पर राजा वैराग्य पूर्वक कहता है कि – ” हे जीव ! तू शीघ्र… अधिक पढ़ें धर्म कार्य कब करना ? आज… आज… और… अभी dharm karya kab karna ? aaj… aaj… aur… abhi

बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी का बलिदान Baba Banda Singh Bahadur ji ka balidan hello

बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर स्थित पुंछ जिले के तहसील राजौरी क्षेत्र में भारद्वाज गोत्र के ब्राह्मण कुल में हुआ। विक्रम संवत् 1727, कार्तिक शुक्ल 13 (1670 ई.) 9 जून को हुआ था। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मणदेव था। लक्ष्मण देव के भाग्य में विद्या नहीं थी , लेकिन छोटी सी उम्र में पहाड़ी… अधिक पढ़ें बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी का बलिदान Baba Banda Singh Bahadur ji ka balidan hello

गोविंद का साक्षात्कार कराना सिर्फ गुरु के हाथ में है। Govind ka sakshatkar karana sirf Guru ke hath mein hai.

एक बार नारद जी भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन हेतु पहुंचे। भगवान ने नारद जी से कुशलता पूछी और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। नारद जी ने बताया कि वह पृथ्वी लोक पर भ्रमण करके आ रहे है। लक्ष्मी माता ने कहा नारद जी ,आपने पृथ्वी लोक पर गुरु से दीक्षा ली या नहीं। नारद जी… अधिक पढ़ें गोविंद का साक्षात्कार कराना सिर्फ गुरु के हाथ में है। Govind ka sakshatkar karana sirf Guru ke hath mein hai.

भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya

भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित होकर गंगा उनकी जाँघ पर आकर बैठ गईं। गंगा ने कहा- “हे राजन! मैं ऋषि की पुत्री गंगा हूँ और आपसे विवाह… अधिक पढ़ें भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya

जीवन में सबसे अधिक बलशाली आत्मबल है। Jivan mein sabse adhik balshali aatmabal hai.

थैला सुंदर लेकिन उसमें गेहूं ही नहीं, तिजोरी आकर्षक लेकिन उसमें संपत्ति ही नहीं, मकान मनमोहक पर उसमें मालिक ही नहीं, शरीर खूबसूरत पर उसमें प्राण ही नहीं…………क्या फायदा ?संपत्ति अथाह, लोकप्रियता बेमिसाल, तप की पूंजी भी अद्भुत, विडंबना यह है कि आत्मविश्वास बिल्कुल नहीं……क्या फायदा ?संपत्ति से दरिद्र, लोकप्रियता बिल्कुल नहीं, और तपस्या भी… अधिक पढ़ें जीवन में सबसे अधिक बलशाली आत्मबल है। Jivan mein sabse adhik balshali aatmabal hai.