आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

 किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था । ब्राह्मण गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था। परमात्मा में आस्था रखने वाला था । वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में नहाने जाया करता था। नहा धो कर पूजा पाठ किया करता था। रोज की तरह वह एक दिन गंगा में नहाने गया नहा… अधिक पढ़ें आत्मा की आवाज़ atma ki awaaz

सुख और आनंद पाना चाहते हो तो वही दूसरे को भी देना सीखो sukh aur Anand Pana chahte ho to vahi dusre ko bhi dena sikho

एक व्यक्ति किसी प्रसिद्ध सूफी संत के पास धर्म संबंधी ज्ञान हासिल करने गया। उस फकीर की चारों ओर ख्याति थी। कहा जाता था कि उनके आशीर्वाद से बीमार लोग स्वस्थ हो जाते थे और बहुतों की परेशानियां दूर हो जाती थीं। दूर प्रांतों से दु:खी -‌ पीड़ित लोग उनके यहां दुआएं मांगते और प्रसन्न… अधिक पढ़ें सुख और आनंद पाना चाहते हो तो वही दूसरे को भी देना सीखो sukh aur Anand Pana chahte ho to vahi dusre ko bhi dena sikho

छोटी सी बात chhoti si baat

वॉशिंगटन में एक बड़ी इमारत थी , जिसकी तीसवीं मंजिल पर हार्नवे नामक एक कंपनी का ऑफिस था। उसमें अनेक कर्मचारी काम करते थे। एक दिन इमारत की लिफ्ट खराब हो गई। उसे ठीक करने में काफी समय लगना था। हार्नवे के कर्मचारियों ने तब सीढ़ियों से दफ्तर पहुंचने का फैसला किया। हालांकि तीसवीं मंजिल… अधिक पढ़ें छोटी सी बात chhoti si baat

ईश्वर की मर्जी के बगैर कुछ भी नहीं होता है ishwar ki marzi ke bagair kuchh Bhi Nahin hota hai

 बहुत समय पहले की बात है। एक शहर में एक दयालु राजा रहता था। उस के यहाँ रोज दो भिखारी भीख मांगने आया करते थे। उन में एक भिखारी जवान था और एक भिखारी बूढ़ा था। राजा उनको रोज रोटी और पैसा दिया करता था। भीख लेने के बाद बूढ़ा भिखारी कहता था ईश्वर देता… अधिक पढ़ें ईश्वर की मर्जी के बगैर कुछ भी नहीं होता है ishwar ki marzi ke bagair kuchh Bhi Nahin hota hai

संसार में किसी कि भी रचना व्यर्थ में नहीं की गई हैं sansar mein Kisi ki Bhi rachna vyrat mein Nahin ki gai hai

एक राज्य के नागरिक बहुत परेशान थे। पक्षी उनके खेत – खलिहान को बर्बाद कर दिया करते थे। एक बार राज्य की जनता अपना दुखड़ा लेकर वे राजा के पास पहुंचे। उनकी परेशानी सुन कर राजा भी क्रोधित हो उठा। उसने ऐलान किया कि राज्य के सारे पक्षियों को मार दिया जाए। और अब से… अधिक पढ़ें संसार में किसी कि भी रचना व्यर्थ में नहीं की गई हैं sansar mein Kisi ki Bhi rachna vyrat mein Nahin ki gai hai

एक बच्चे की सीख ek bacche ki Sikh

बायजीद नाम का एक मुसलमान फकीर हुआ है। वह गांव से गुजर रहा था। सांझ का समय था , वह रास्ता भटक गया। तभी उसने एक बच्चे को हाथ में दीपक ले जाते हुए देखा। उसने बच्चे को रोककर पूछा , ‘ यह दीया किसने जलाया और इसे लेकर तुम कहां जा रहे हो ?… अधिक पढ़ें एक बच्चे की सीख ek bacche ki Sikh

क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

हिन्दू धर्म में पूरणो और वेदो  के अनुसार ॐ नमः शिवाय का मन्त्र खुद में इतना सर्वशक्तिमान , सर्वशक्तिशाली तथा सम्पूर्ण ऊर्जा का श्रोत है की मात्र इसके उच्चारण से ही समस्त दु:खो , कष्टो का विनाश होता है तथा हर कामना की प्रतिपूर्ति हो जाती है। ॐ अक्षर के बिना किसी घर की पूजा पूर्ण नही मानी जाती… अधिक पढ़ें क्यों माना जाता है ओम को महामंत्र तथा क्या लाभ है इसके उच्चारण के kyon mana jata hai Om ko mahamantra tatha kya labh hai iske uchcharan ke

कर्तव्य बोध होना अति आवश्यक है kartavya Bodh hona ati avashyak hai

एक किसान को विरासत में खूब धन – संपत्ति मिली। वह दिनभर खाली बैठा हुक्का गुड़गुड़ाता और गप्प हांकता रहता। रिश्तेदार और काम करने वाले नौकर – चाकर उसके आलस्य का लाभ उठाते और उसके माल पर हाथ साफ करने में लगे रहते। एक दिन उसका पुराना मित्र उससे मिलने आया। यह अव्यवस्था देखकर उसे… अधिक पढ़ें कर्तव्य बोध होना अति आवश्यक है kartavya Bodh hona ati avashyak hai

मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

एक सेठ थे। उनकी कोठी के बाहर सड़क के किनारे एक मोची बैठता था जो जूते मरम्मत करने के दौरान बीच – बीच में भजन या कोई गीत गुनगुनाता रहता था , लेकिन सेठ जी का ध्यान कभी मोची के गानों पर नहीं गया। एक बार सेठ जी बीमार पड़ गए। बिस्तर पकड़ लिया ।… अधिक पढ़ें मेहनत की कमाई mehnat ki kamai

शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor

राजा होने के कारण देवराज इंद्र को अपने आप पर बहुत घमंड आ चूका था तथा अन्य देवताओ को वे अपने समक्ष तुच्छ समझते थे। अपनी राजगद्दी को भी लेकर वे इतने आशंकित रहते थे की यदि कोई ऋषि मुनि तपश्या में बैठे तो वे आतंकित हो जाते थे , कहीं वो वरदान में त्रिदेवो से इन्द्रलोक का सिहासन ना मांग ले। ऐसे ही… अधिक पढ़ें शनि देव ने केवल अपनी छाया मात्र से किया देवराज इंद्र का घमंड चूर Shani Dev ne keval apni chhaya matra se Kiya devraj Indra ka ghamand choor