पृथ्वी पर सर्वप्रथम श्राद्ध प्रथा इन्होंने ही शुरू की prithvi per sarvpratham shraddh pratha unhone hi shuru ki

हिन्दू धर्म में हर संतान के लिए यह परम कर्तव्य माना गया है की वह अपने पिता या पूर्वजो  को तृप्त करने के लिए श्राद्ध अवश्य करे। श्राद्ध के समय पितृलोक  से पूर्वज भोजन की आशा में पृथ्वी लोक अपने पुत्र वंशजो के पास आते है तथा श्राद्ध के रूप में हम जो प्रसाद ब्राह्मण , गाय ,… अधिक पढ़ें पृथ्वी पर सर्वप्रथम श्राद्ध प्रथा इन्होंने ही शुरू की prithvi per sarvpratham shraddh pratha unhone hi shuru ki

नाम से ही सारे दु:ख दूर हो जाएंगे। Naam say hi saree dukh dur ho jaenge.

एक बार की बात है माता अंजना हनुमान जी को कुटी में लिटाकर कहीं बाहर चली गई। थोड़ी देर में इन्हें बहुत तेज भूख लगी। इतने में आकाश में सूर्य भगवान उगते हुए दिखलायी दिये। इन्होंने समझा यह कोई लाल लाल सुंदर मीठा फल है। बस, एक ही छलांग में यह सूर्य भगवान के पास… अधिक पढ़ें नाम से ही सारे दु:ख दूर हो जाएंगे। Naam say hi saree dukh dur ho jaenge.

जब तक विश्वास है तब तक जीवन है। Jab tak vishwas hai tab tak jivan hai.

जीवन में जो महत्व स्वास का है, समाज में वही महत्व विश्वास का है। विश्वास जीवन की स्वास है, विश्वास जीवन की आस है, विश्वास जीवन की प्यास है। दुनिया विश्वास पर टिकी है। जब तक विश्वास- है तब तक दुनिया है। विश्वास उठा यह दुनिया भी उठ जाएगी । लोग कहते हैं, पृथ्वी शेषनाग… अधिक पढ़ें जब तक विश्वास है तब तक जीवन है। Jab tak vishwas hai tab tak jivan hai.

धार्मिकता का चोला पहनकर भीतर से नास्तिक होकर धर्म को लूटते जा रहे हैं dharmikta ka chola pahankar bhitar se nastik hokar dharm ko loot te ja rahe hain

इन दिनों अर्थ का बोलबाला इतनी तेजी से बढ़ रहा है। कि हर वर्ग के लोग येन केन प्रकारेण धन एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। भले ही उसके दुष्परिणाम उसकी दुनिया को उजाड़ दें मगर पाप और पुण्य की परिभाषा को नजरअंदाज कर हर व्यक्ति इस दौड़ में से दौड़ रहा है। जिस परमपिता… अधिक पढ़ें धार्मिकता का चोला पहनकर भीतर से नास्तिक होकर धर्म को लूटते जा रहे हैं dharmikta ka chola pahankar bhitar se nastik hokar dharm ko loot te ja rahe hain

अपने आपको व्यस्त रखिए और मस्त रहिए। Apni aapko vyast rakhiye aur mast rahiye.

तनाव का सबसे बड़ा कारण बचाव प्रवृत्ति है। जब मन स्थितियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता, तो मन में हमेशा असुरक्षा का भय बैठा रहता है। हर स्थिति उसे डरावनी लगती है। मन निरमूल आशंकाओं से घिरा रहता है। इंसान खुद के प्रति अरुचिकर हो जाता है और वह किसी भी स्थिति को… अधिक पढ़ें अपने आपको व्यस्त रखिए और मस्त रहिए। Apni aapko vyast rakhiye aur mast rahiye.

दुनिया में केवल वे मरते हैं, जो मन को नहीं मार पाते। Duniya mein keval Ve marte Hain Jo Man ko nahin maar paate.

असली समस्या मन है। इंद्रियां तो केवल स्विच है, मेन-स्विच तो मन ही है। जब कभी भी कोई विश्वामित्र अपनी तपस्या और साधना से फिसलता और गिरता है तो इसके लिए दोष हमेशा मेनका को दिया जाता है जबकि दोष ‘मेनका’का नहीं, आदमी के ‘मन- का ‘है कोई भी आदमी मेनका के आकर्षण की वजह… अधिक पढ़ें दुनिया में केवल वे मरते हैं, जो मन को नहीं मार पाते। Duniya mein keval Ve marte Hain Jo Man ko nahin maar paate.

आपके बीमार रहने से ही डॉक्टर धनवान बन सकता है। Aapke bimar rahane se hi doctor dhanwan ban sakta hai

एक व्यक्ति ने पूछा – गुरुजी ! दुनिया का सबसे बड़ा रोग कौन सा है ? दुनिया में तरह तरह के रोग हैं। खतरनाक रोग है। एक से बढ़कर एक रोग है। लाजवाब और लाइलाज रोग हैं। कैंसर है, ऐड्स है, हार्ट अटैक है, डायबिटीज है ,ब्रेन हेमरेज है, पैरालिसिस है, वगैरह । आजकल औषधियां… अधिक पढ़ें आपके बीमार रहने से ही डॉक्टर धनवान बन सकता है। Aapke bimar rahane se hi doctor dhanwan ban sakta hai

किताबी पढ़ाई से अधिक अनुभव ज्ञान जरूरी है Kitabi padhaai se adhik anubhav Gyan jaruri hai

किसी शहर में महाकाय फैक्ट्री थी।उसमें लगभग सात सौ लोग काम करते थे। एक बार छोटी सी बात का बतंगड़ हो गया। फैक्ट्री में रबड़ का एक टेढ़ा मेढ़ा पाइप था। उसमें रबड़ का एक पतला सा वायर डालकर दूसरे छोर से बाहर निकालना था। काफी मेहनत की गई पर टेढ़े मेढ़े पाइप से वायर… अधिक पढ़ें किताबी पढ़ाई से अधिक अनुभव ज्ञान जरूरी है Kitabi padhaai se adhik anubhav Gyan jaruri hai

शिष्य से गुरू महान है, तो बताओ पाप का बाप कौन है ? Shishya se guru mahan hai to batao paap ka baap kaun hai ?

एक गांव में पंडित ब्राह्मण रहता था उसकी एक बेटी थी। ब्राह्मण का एक शिष्य था। जो उससे पंडिताई सीख रहा था। शिष्य की शिक्षा समाप्त होने पर उस शिष्य ने पंडित से गुरु दक्षिणा मांगने का आग्रह किया पंडित के मन में विचार आया कि इस शिष्य को क्यों ना अपना दामाद बना लिया… अधिक पढ़ें शिष्य से गुरू महान है, तो बताओ पाप का बाप कौन है ? Shishya se guru mahan hai to batao paap ka baap kaun hai ?

सेवा ही सत्ता, समृद्धि और संपत्ति को आकर्षित करने वाला वशीकरण मंत्र है। Seva hi satta, samriddhi aur sampatti ko akarshit karne wala vashikaran mantra hai.

सत्ता शब्द ‘ सत् ‘ से बना है। भाषा शास्त्र की दृष्टि से सत्य और सत्ता एक ही अर्थ को बताने वाले पर्याय हैं। परंतु आजकल सत्ता शब्द जिस अर्थ में प्रचलित हुआ है और जिस रूढ व्यवहार में आ रहा है उस पर से यह कहा जा सकता है कि सत्य और सत्ता में… अधिक पढ़ें सेवा ही सत्ता, समृद्धि और संपत्ति को आकर्षित करने वाला वशीकरण मंत्र है। Seva hi satta, samriddhi aur sampatti ko akarshit karne wala vashikaran mantra hai.