जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

एक बार सभी देवता नारद के विषय में चर्चा कर रहे थे। वे सभी नारद जी के बिना बुलाये कहीं भी बार – बार आ जाने को लेकर बहुत परेशान थे। उन्होंने निश्चय किया की वे अपने द्वारपालों से कहकर नारद जी को किसी भी दशा में अंदर प्रवेश नही करने देंगे और किसी न किसी बहाने से उन्हें टाल देंगे।… अधिक पढ़ें जब देवता हुए नारद से परेशान तथा बंद किये सभी स्वर्ग के द्वार ! Jab devta hue narad se pareshan tatha band ki sabhi swarg ke dwar !

निंदा करने से दूसरों के साथ अपना भी नुकसान होता है ninda karne se dusron ke sath apna Bhi nuksan hota hai

एक विदेशी को अपराधी समझ जब राजा ने फांसी का हुक्म सुनाया तो उसने अपशब्द कहते हुए राजा के विनाश की कामना की। राजा ने अपने मंत्री से , जो कई भाषाओं का जानकार था , पूछा – यह क्या कह रहा है ? मंत्री ने विदेशी की गालियां सुन ली थीं , किंतु उसने… अधिक पढ़ें निंदा करने से दूसरों के साथ अपना भी नुकसान होता है ninda karne se dusron ke sath apna Bhi nuksan hota hai

एक दूजे के लिए ek duje ke liye

एक दंपत्ति की शादी को साठ वर्ष हो चुके थे। उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी थी कि इन साठ वर्षों में उनमें कभी झगड़ा तक नहीं हुआ। वे एक दूजे से कभी कुछ भी छिपाते नहीं थे। हां , पत्‍‌नी के पास उसके मायके से लाया हुआ एक डिब्बा था जो उसने अपने पति के… अधिक पढ़ें एक दूजे के लिए ek duje ke liye

बीते हुए कल के कारण आज और भविष्य को मत बिगाड़ो beete hue kal ke Karan aaj aur bhavishya ko mat bigado

बुद्ध भगवान एक गाँव में उपदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि “ हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए। क्रोध ऐसी आग है जिसमें क्रोध करनेवाला दूसरोँ को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा। ” सभा में सभी शान्ति से बुद्ध की वाणी सून रहे थे , लेकिन वहाँ… अधिक पढ़ें बीते हुए कल के कारण आज और भविष्य को मत बिगाड़ो beete hue kal ke Karan aaj aur bhavishya ko mat bigado

मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun

एक बौद्ध धर्मगुरु थे। उनके दर्शनों के लिए लोग अक्सर आश्रम में आते थे। स्वामीजी बड़ी उदारता से सबसे मिलते – बात करते और उनकी समस्याओं का समाधान करते। रोज स्वामीजी के पास दर्शनार्थी की भीड़ लगी रहती थी। स्वामीजी की प्रशंसा सुनकर एक साधारण ग्रामीण बहुत प्रभावित हुआ। वह भी स्वामीजी के दर्शानार्थ आश्रम… अधिक पढ़ें मैं जो कल था आज वह में नहीं हुं main Jo kal tha aaj vah main Nahin hun

दान देना जीवन का सबसे बड़ा शुभ कर्म है Dan dena Jeevan ka sabse bada shubh karma hai

एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है। पूर्णिमा का… अधिक पढ़ें दान देना जीवन का सबसे बड़ा शुभ कर्म है Dan dena Jeevan ka sabse bada shubh karma hai

भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya

भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित होकर गंगा उनकी जाँघ पर आकर बैठ गईं। गंगा ने कहा- “हे राजन! मैं ऋषि की पुत्री गंगा हूँ और आपसे विवाह… अधिक पढ़ें भीष्म पितामह का जन्म और उनकी अखंड प्रतिज्ञा bhishm pitamah ka janm aur unki akhand pratigya

नाम से ही सारे दु:ख दूर हो जाएंगे। Naam say hi saree dukh dur ho jaenge.

एक बार की बात है माता अंजना हनुमान जी को कुटी में लिटाकर कहीं बाहर चली गई। थोड़ी देर में इन्हें बहुत तेज भूख लगी। इतने में आकाश में सूर्य भगवान उगते हुए दिखलायी दिये। इन्होंने समझा यह कोई लाल लाल सुंदर मीठा फल है। बस, एक ही छलांग में यह सूर्य भगवान के पास… अधिक पढ़ें नाम से ही सारे दु:ख दूर हो जाएंगे। Naam say hi saree dukh dur ho jaenge.

जब तक विश्वास है तब तक जीवन है। Jab tak vishwas hai tab tak jivan hai.

जीवन में जो महत्व स्वास का है, समाज में वही महत्व विश्वास का है। विश्वास जीवन की स्वास है, विश्वास जीवन की आस है, विश्वास जीवन की प्यास है। दुनिया विश्वास पर टिकी है। जब तक विश्वास- है तब तक दुनिया है। विश्वास उठा यह दुनिया भी उठ जाएगी । लोग कहते हैं, पृथ्वी शेषनाग… अधिक पढ़ें जब तक विश्वास है तब तक जीवन है। Jab tak vishwas hai tab tak jivan hai.

धार्मिकता का चोला पहनकर भीतर से नास्तिक होकर धर्म को लूटते जा रहे हैं dharmikta ka chola pahankar bhitar se nastik hokar dharm ko loot te ja rahe hain

इन दिनों अर्थ का बोलबाला इतनी तेजी से बढ़ रहा है। कि हर वर्ग के लोग येन केन प्रकारेण धन एकत्रित करने में जुटे हुए हैं। भले ही उसके दुष्परिणाम उसकी दुनिया को उजाड़ दें मगर पाप और पुण्य की परिभाषा को नजरअंदाज कर हर व्यक्ति इस दौड़ में से दौड़ रहा है। जिस परमपिता… अधिक पढ़ें धार्मिकता का चोला पहनकर भीतर से नास्तिक होकर धर्म को लूटते जा रहे हैं dharmikta ka chola pahankar bhitar se nastik hokar dharm ko loot te ja rahe hain