स्वस्थ और सुखी जीवन का रहस्य swasth aur sukhi jivan ka rahasya

पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय उनकी सेवा उपलब्ध रहते थे। उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी। फिर भी राजा उसके जीवन के सुखी नहीं था। क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशान रहता था। वे सदा बीमारियों से घिरे रहते थे। राजा… अधिक पढ़ें स्वस्थ और सुखी जीवन का रहस्य swasth aur sukhi jivan ka rahasya

पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

एक गांव के किनारे बनी कुटिया में एक साधु रहता था । वह दिन भर ईश्वर का भजन-कीर्तन करके समय बिताता था । उसे न तो अपने भोजन की चिंता रहती थी और न ही धन कमाने की । गांव के लोग स्वयं ही उसे भोजन दे जाते थे । साधू उसी भोजन से पेट… अधिक पढ़ें पशु , पक्षी भी प्यार के बदले प्यार चाहते हैं pashu pakshi bhi pyar ke badle pyar chahte Hain

शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिनका सादर नमन करते हों , उन शस्त्रधारी और शास्त्रज्ञ भगवान परशुराम की महिमा का वर्णन शब्दों की सीमा में संभव नहीं। वे योग , वेद और नीति में निष्णात थे , तंत्रकर्म तथा ब्रह्मास्त्र समेत विभिन्न दिव्यास्त्रों के संचालन में भी पारंगत थे , यानी जीवन और अध्यात्म की हर विधा… अधिक पढ़ें शस्त्र और शास्त्र के महारथी – परशुराम shastra aur shastra ke maharathi – parshuram

वृद्धावस्था का मूल्य vridhavastha ka mulya

एक राजकुमार को वृद्धों से घृणा थी। वह कहा करता था , ‘ बूढ़ों की बुद्धि कुंठित हो जाती है। वे सदा बेतुकी बातें किया करते हैं। वे किसी काम के नहीं होते। ’ उसके दरबारी भी उसकी हां में हां मिलाते रहते थे। एक बार राजकुमार अपने कुछ सैनिकों के साथ शिकार खेलने गया।… अधिक पढ़ें वृद्धावस्था का मूल्य vridhavastha ka mulya

भक्त और भगवान bhakt aur bhagwan

तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थी कि वह तो कृष्ण से अथाह प्रेम करते हैं ।फिर उनका नाम कोई क्यों नहीं लेता , हर भक्त ‘राधे-राधे ’ क्यों करता रहता है। वह अपनी यह व्यथा लेकर श्रीकृष्ण के पास पहुंचे। नारदजी ने देखा कि श्रीकृष्ण भयंकर… अधिक पढ़ें भक्त और भगवान bhakt aur bhagwan

पड़े निन्यानवे के चक्कर में pade Ninyanve ke chakkar mein

सेठ करोड़ी मल पैसे से तो करोड़पति था मगर खर्च करने के मामले में महाकंजूस। उसका ये हाल था कि चमड़ी जाये पर दमड़ी न जाए। उस की इस आदत से उसके बीवी बच्चे बहुत परेशान थे। सब कुछ होते हुए भी करोड़ी मल खाने पीने तक में कंजूसी करता था। उसका बस चले तो… अधिक पढ़ें पड़े निन्यानवे के चक्कर में pade Ninyanve ke chakkar mein

औसत आदमी इस भ्रमण चक्र में निरत रहकर दिन गुजार देता है। Ausat aadami is Brahman chakra mein nirath rahakar din gujar deta hai

समय का सदुपयोग करना सीखें जीवन क्या है? इसका उत्तर एक शब्द में अपेक्षित हो तो कहा जाना चाहिए — ‘ समय ’। समय और जीवन एक ही तथ्य के दो नाम हैं। कोई कितने दिन जिया ? इसका उत्तर वर्षों की काल गणना के रूप में ही दिया जा सकता है। समय की सम्पदा… अधिक पढ़ें औसत आदमी इस भ्रमण चक्र में निरत रहकर दिन गुजार देता है। Ausat aadami is Brahman chakra mein nirath rahakar din gujar deta hai

निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

महात्मा बुद्ध एक गाँव में ठहरे हुए थे। वे प्रतिदिन शाम को वहाँ पर सत्संग करते थे। भक्तों की भीड़ होती थी , क्योंकि उनके प्रवचनों से जीवन को सही दिशा बोध प्राप्त होता था। बुद्ध की वाणी में गजब का जादू था। उनके शब्द श्रोता के दिल में उतर जाते थे। एक युवक प्रतिदिन… अधिक पढ़ें निरंतर सत्संग से दुर्जन भी सज्जन हो जाते हैं nirantar satsang se durjan bhi sajjan ho jaate Hain

आत्म – कल्याण ही मनुष्य जीवन का सच्चा लक्ष्य है aatm Kalyan hi manushya jeevan ka saccha lakshya hai

   एक नवयुवक एक सिद्ध महात्मा के आश्रम में आया करता था। महात्मा उनकी सेवा से प्रसन्न हो बोले – बेटा ” आत्म – कल्याण ही मनुष्य जीवन का सच्चा लक्ष्य है इसे ही पूरा करना चाहिए। ’’ यह सुन युवक ने कहा – महाराज वैराग्य धारण करने पर मेरे माता – पिता कैसे जीवित… अधिक पढ़ें आत्म – कल्याण ही मनुष्य जीवन का सच्चा लक्ष्य है aatm Kalyan hi manushya jeevan ka saccha lakshya hai

अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya

श्रमण हरिकेशबल चांडाल कुल में उत्पन्न हुए थे। बचपन में जातिवाद के शिकार हुए। उन्हें संसार से घृणा हुई और वे श्रमण बन गए। एक दिन हरिकेशबल ध्यान में लीन थे। राजकुमारी भद्रा मंदिर में पूजन कर बाहर निकली थी। अचानक भद्रा की नजर हरिकेशबल पर पड़ी। हरिकेशबल का काला – कलूटा शरीर देखकर राजकुमारी… अधिक पढ़ें अंतर – सौंदर्य Antar – soundarya